यूरोप ने रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में भारत से मांगी मदद, पीएम मोदी से की खास अपील

भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने की पहल की हो, लेकिन अमेरिका के सहयोगी यूरोपीय देशों की उम्मीदें भारत से लगी हैं। यूरोपियन यूनियन के प्रमुख नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने में सहयोग की अपील की है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड5 Sep 2025, 08:53 AM IST
यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने की पीएम मोदी से बात।
यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने की पीएम मोदी से बात। (Mint)

यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने गुरुवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में उनकी मदद मांगी। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि रूस को उसकी आक्रामक कार्रवाई खत्म करने और शांति का मार्ग प्रशस्त करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों नेताओं ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ भारत के निरंतर संवाद का स्वागत भी किया।

यूरोप की पीएम मोदी से अपील- यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने में करें मदद

विदेश मंत्रालय के जारी एक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए भारत के लगातार समर्थन को दोहराया। इस बातचीत में तीनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों का सामूहिक रूप से समाधान करने और आपसी समृद्धि के लिए नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी की भूमिका को रेखांकित किया।

यह फोन कॉल ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% का दंडात्मक शुल्क लगाया गया है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा का हवाला देते हुए रूस से तेल खरीद का बचाव किया है, जो वर्तमान में भारत की लगभग 40% ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है।

शांति प्रयासों में भारत की सक्रिय भागीदारी

इसी क्रम में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्रेई सिबिहा से बात की। जयशंकर ने कहा कि भारत इस संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने और एक स्थायी शांति की स्थापना का समर्थन करता है। सिबिहा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्हें युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने और व्यापक अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों के समर्थन में भारत की 'आधिकारिक आवाज और सक्रिय भूमिका' पर भरोसा है।

यह बातचीत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद हुई। मोदी ने पुतिन से कहा था कि भारत यूक्रेन में शांति के लिए किए गए सभी प्रयासों का स्वागत करता है, और मानवता की यह मांग है कि जल्द से जल्द संघर्ष को समाप्त करने का मार्ग खोजा जाए।

हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके खुशी हुई। हम राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ भारत के निरंतर संपर्क का हार्दिक स्वागत करते हैं। रूस को उसके आक्रामक युद्ध को समाप्त करने और शांति की राह बनाने में मदद करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह युद्ध वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती है जो आर्थिक स्थिरता को भी कमजोर करता है। इसलिए यह पूरी दुनिया के लिए एक जोखिम है। भविष्य को देखते हुए हम 2026 में जल्द से जल्द अगले यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त रणनीतिक एजेंडे पर सहमत होने की योजना बना रहे हैं। हम वर्ष के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी करने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इसे हासिल करने के लिए अभी प्रगति जरूरी है।- अंतोनियो कोस्ता, अध्यक्ष, यूरोपीय संघ और उर्सुला वॉन डेर लेयेन, अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग

एफटीए और आईएमईईसी पर भी हुई प्रगति

यूक्रेन संघर्ष के अलावा, भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में भी महत्वपूर्ण प्रगति पर चर्चा की। दोनों पक्ष इस साल के अंत तक बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। वॉन डेर लेयेन ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तत्काल प्रगति की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके साथ ही, नेताओं ने आईएमईईसी (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) के कार्यान्वयन की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस गलियारे का उद्देश्य एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच एक वृहद सड़क, रेल और शिपिंग नेटवर्क स्थापित करना है। मोदी ने दोनों नेताओं को भारत में अगला भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए भी आमंत्रित किया।

युद्ध के बाद यूक्रेन की सुरक्षा

इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यूक्रेन के 26 सहयोगी देशों ने रूस के साथ संघर्ष समाप्त होने के बाद यूक्रेन में सैनिकों को तैनात करने की प्रतिबद्धता जताई है। इन सैनिकों को 'सुरक्षा आश्वासन बल' के रूप में तैनात किया जाएगा ताकि युद्धविराम या शांति स्थापित होने के तुरंत बाद देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह कदम दिखाता है कि एक तरफ शांति के प्रयास जारी हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध के बाद की स्थितियों के लिए भी तैयारी की जा रही है।

(भाषा, वार्ता और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स से इनपुट के साथ)

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