
Work From Home amidst LPG Crisis: पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब आम लोगों की जिंदगी में भी दिख रहा है। दुनिया की ऊर्जा सप्लाई और ईंधन बाजार इससे प्रवाभित हुई है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर अहम है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। बढ़ती कीमतों और वैश्विक हालात के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या ईंधन बचाने के लिए फिर से वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है।
भारत अपनी जरूरत की दो-तिहाई एलपीजी आयात करता है, जिसका 90% हिस्सा कतर, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से आता है। इन देशों से आने वाले जहाज 'होर्मुज स्ट्रेट' के रास्ते भारत पहुंचते हैं। ईरान ने फिलहाल इस रास्ते को बंद कर दिया है, जिसकी वजह से एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई ठप हो गई है।
इस सप्लाई संकट का असर दिखना शुरू हो गया है। 7 मार्च से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ चुके हैं। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए रिफाइनरियों को 100% क्षमता पर काम करने का आदेश दिया है ताकि देश में ईंधन की कमी न हो।
इन हालातों के बीच इन्वेस्टमेंट बैंकर सार्थक आहूजा ने एक दिलचस्प संभावना जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि अगर ईंधन संकट गहराता है तो सरकार कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य करने का फैसला ले सकती है। उन्होंने बताया कि थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देशों में कंपनियों को पहले ही सलाह दी गई है कि वे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दें और विदेश यात्राओं को केवल आपात स्थिति तक सीमित रखें। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
सार्थक आहूजा के कहा कि भारत में भी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली गैस को अब घरों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। आने वाले समय में होटल और रेस्टोरेंट की गैस सप्लाई रोकी जा सकती है ताकि आम लोगों को घर में खाना पकाने के लिए गैस मिलती रहे। इसके अलावा जेट फ्यूल की कमी के कारण उड़ानों के किराए बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में कुछ समय के लिए स्कूलों में भी ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
काउंसिल ऑफ एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) के एक्सपर्ट अभिषेक कर ने कहा कि भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है, और इसमें से 90% से ज्यादा सप्लाई पश्चिम एशिया से आती है। ऐसे में जरूरी है कि घरेलू गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत को खाना पकाने के ईंधन के लिए LPG पर निर्भरता कम करनी होगी। इसी कारण इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव और ई-कुकिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। जिन परिवारों के पास पहले से इंडक्शन स्टोव है या जो इसे खरीद सकते हैं, उन्हें LPG की जगह इसका इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2047 तक भारत में खाना पकाने के ईंधन में LPG की हिस्सेदारी लगभग 15% तक रह सकती है। इसके लिए अगले 10 वर्षों में बड़े बदलाव की जरूरत होगी।
इस पूरे संकट के बीच एक राहत की खबर ये है कि देश की सभी तेल रिफाइनरियां फिलहाल 100% क्षमता पर काम कर रही हैं। रिफाइनरियां ही वह जगह होती हैं जहां कच्चे तेल को प्रोसेस करके पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और LPG जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। अगर रिफाइनरियों का उत्पादन कम हो जाए तो बाजार में ईंधन की कमी की स्थिति पैदा हो सकती है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई बड़ा संकट सामने नहीं आया है और सरकार ने भी तेल कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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