
हैमिल्टन: एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि किसी व्यक्ति की मातृभाषा उसके पढ़ने के तरीके को प्रभावित करती है और यह अंतर आंखों की गति से समझा जा सकता है। जब हम पढ़ते हैं, तो हमारी आंखें किस शब्द पर रुकती हैं, कौन-से शब्द दोबारा देखती हैं और किन्हें छोड़ देती हैं इससे यह पता चलता है कि हम किसी भाषा को कैसे समझते हैं।
पढ़ना एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है। यह न सिर्फ शिक्षा और करियर से जुड़ा है, बल्कि समाज में आगे बढ़ने की क्षमता का भी संकेत देता है। किसी नए देश में आने वाले व्यक्ति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह नई भाषा में कितनी अच्छी तरह पढ़ और समझ सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि भाषा पर मजबूत पकड़ और पढ़ने की योग्यता रोजगार पाने और समाज में सक्रिय भागीदारी के लिए बहुत जरूरी है। आज जब कनाडा जैसे देशों में बड़ी संख्या में प्रवासी रह रहे हैं, तब दूसरी भाषा में पढ़ने की प्रक्रिया को समझना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
अब तक ज्यादातर वैज्ञानिक शोध अंग्रेजी भाषा पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन हर भाषा का लेखन तंत्र अलग होता है।
इस विविधता के कारण वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि क्या लोग अपनी मातृभाषा में जो पढ़ने की आदतें बनाते हैं, वही दूसरी भाषा में भी अपनाते हैं।
‘मल्टीलिंगुअल आई-मूवमेंट कॉर्पस’ (MECО) नामक एक वैश्विक परियोजना इन सवालों के जवाब खोजने की कोशिश कर रही है। इसमें 40 से ज्यादा देशों के वैज्ञानिक शामिल हैं।
यह प्रोजेक्ट कैमरे की मदद से यह रिकॉर्ड करती है कि कोई व्यक्ति पढ़ते समय कहां-कहां नजर डालता है, कौन-से शब्द छोड़ता है और कौन-से दोबारा पढ़ता है।
सभी देशों में प्रयोग एक जैसी प्रक्रिया से होते हैं। प्रतिभागियों को एक समान अंग्रेजी पाठ और उसी का अपनी मातृभाषा में अनुवादित पाठ पढ़ाया जाता है ताकि दोनों की तुलना की जा सके।
अध्ययन में पाया गया कि किसी व्यक्ति की मातृभाषा में पढ़ने का तरीका उसकी दूसरी भाषा में पढ़ने की शैली को भी प्रभावित करता है। लगभग आधे मामलों में यह प्रभाव साफ नजर आया।
उदाहरण के लिए:
जब ये लोग दूसरी भाषा सीखते हैं, तो वही पढ़ने की आदतें साथ लेकर आते हैं।
शोध में यह भी देखा गया कि समझ और आंखों की गति हमेशा एक जैसी नहीं होती। कई लोग दूसरी भाषा (जैसे अंग्रेजी) में उतनी ही अच्छी समझ दिखाते हैं जितनी मूल वक्ता, लेकिन उनकी आंखें ज्यादा मेहनत करती हैं यानी वे शब्दों को बार-बार पढ़ते हैं या अधिक देर तक देखते रहते हैं।
चीनी विज्ञान अकादमी की शोधकर्ता याकियान बोरोगजून बाओ के अनुसार, यह परियोजना कम अध्ययन वाली भाषाओं पर भी शोध को प्रोत्साहित करेगी। वहीं, ब्राज़ील की शिक्षिका मरीना लीटे का कहना है कि इस अध्ययन से ब्राज़ीलियाई पुर्तगाली भाषा में साक्षरता सुधारने के बेहतर तरीके मिल सकते हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि बहुभाषी कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह अध्ययन बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। इससे शिक्षकों और नीति-निर्माताओं को ऐसी रणनीतियां बनाने में मदद मिलेगी, जिससे छात्र कई भाषाओं में बेहतर पढ़ने और समझने की क्षमता विकसित कर सकें।
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