FDI in Insurance: भारत की इंश्योरेंस इंडस्ट्री इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल, सरकार अब बीमा क्षेत्र में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) लिमिट को 74% से बढ़ाकर 100% करने की तैयारी में है। इससे मार्केट में पैसा भी बढ़ेगा और नई कंपनियों की एंट्री भी आसान हो जाएगी।
शीतकालीन सत्र में पेश होगा बिल
संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। कुल 15 वर्किंग डेज वाले इस सत्र में सरकार Insurance Laws (Amendment) Bill 2025 को पेश करेगी। यह वही बिल है जिस पर इस हफ्ते लोकसभा बुलेटिन में नोटिफिकेशन जारी हुआ है। बिहार विधानसभा चुनावों के बाद ये पहला सत्र होगा, इसलिए इसमें कई अहम फैसलों की उम्मीद की जा रही है।
FDI लिमिट 74% से सीधे 100%
फिलहाल भारत में इंश्योरेंस सेक्टर में FDI की सीमा 74% है। लेकिन फरवरी में बजट पेश करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे 100% तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। सरकार का मानना है कि इससे इंश्योरेंस सेक्टर में तेजी, आसान बिजनेस माहौल और ज्यादा से ज्यादा कंपनियों के बाजार में आने का रास्ता खुलेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह लाभ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो अपनी पूरी प्रीमियम इनकम भारत में ही निवेश करेंगी। साथ ही, विदेशी निवेश से जुड़ी पुरानी शर्तों को आसान और सरल किया जाएगा।
अब तक कितना निवेश आया है?
PTI की एक रिपोर्ट के के अनुसार, FDI के जरिए इंश्योरेंस सेक्टर अब तक करीब ₹82,000 करोड़ निवेश आकर्षित कर चुका है। मगर सरकार का मानना है कि 100% FDI खुलने से ये सेक्टर और ज्यादा मजबूत होगा, नए प्रोडक्ट्स आएंगे और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे।
कौन-कौन से कानून बदलेंगे?
सरकार Insurance Act 1938, LIC Act 1956 और IRDA Act 1999 में बदलाव की तैयारी कर रही है। इन परिवर्तनों में LIC के बोर्ड को ज्यादा अधिकार देना शामिल है जैसे नई शाखाएं खोलने का फैसला, भर्ती से जुड़ी मंजूरी और रोजमर्रा के संचालन से जुड़े कई अहम निर्णय।
सरकार चाहती है कि इंश्योरेंस इंडस्ट्री 2047 तक ‘Insurance for All’ के लक्ष्य को हासिल कर सके। इसके लिए उद्योग में नई कंपनियों की एंट्री, बेहतर संरचना और रोजगार बढ़ाना मुख्य लक्ष्य है।
सरकार का एजेंडा
इन बदलावों का मकसद केवल इंश्योरेंस कंपनियों को बढ़ाना ही नहीं, बल्कि देश में आर्थिक विकास और रोजगार को भी गति देना है। सरकार का मानना है कि जब बाजार में ज्यादा प्लेयर्स आएंगे तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, सेवाओं में सुधार होगा और पॉलिसीहोल्डर्स को ज्यादा भरोसेमंद विकल्प मिलेंगे।
सिक्योरिटीज मार्केट में भी बड़ा कदम
वित्त मंत्रालय सिर्फ इंश्योरेंस तक ही सीमित नहीं है। इसी सत्र में Securities Markets Code Bill 2025 भी लाया जाएगा। इसमें SEBI Act 1992, Depositories Act 1996 और Securities Contracts Regulation Act 1956 जैसे पुराने कानूनों को मिलाकर एक नया, सिंगल कोड बनाया जाएगा ताकि नियम और भी सरल और आधुनिक बन सकें।
आने वाला विंटर सेशन इंश्योरेंस और फाइनेंस सेक्टर के लिए बेहद ऐतिहासिक होने वाला है।