NDA से पहली बार 17 महिला कैडेट्स पासआउट, क्यों है ये इतना खास और कहां होगी पोस्टिंग? सब कुछ पढ़ें यहां

पुणे स्थित NDA से पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने ग्रेजुएट होकर इतिहास रच दिया। श्रृति दक्ष बनीं पहली महिला टॉपर। अब ये बहादुर बेटियां भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में ऑफिसर बनेंगी। ये पल 'नारी शक्ति' की असली तस्वीर है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड30 May 2025, 07:02 PM IST
शुक्रवार को महाराष्ट्र के पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 148वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान महिला कैडेटों का पहला बैच।
शुक्रवार को महाराष्ट्र के पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 148वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान महिला कैडेटों का पहला बैच।(PTI)

भारत की बेटियां अब उस सेना का हिस्सा बन चुकी हैं जो दुश्मनों की नींद उड़ा देंगी। अब पाकिस्तान भी देखेगा भारत की बेटियों की बहादुरी। ये वही बेटियां हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, हिम्मत और जज्बे से इतिहास रच दिया है। पुणे की नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने तीन साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद शुक्रवार को पासआउट होकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

पहली बार NDA से पासआउट हुईं 17 महिला कैडेट्स

खड़कवासला स्थित NDA के खेत्रपाल परेड ग्राउंड में ‘अंतिम पग’ से गुजरते हुए इन बेटियों ने इतिहास लिखा। पासिंग आउट परेड के दौरान मुख्य अतिथि थे पूर्व सेना प्रमुख और वर्तमान मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह। उन्होंने इस मौके को ‘नारी शक्ति की जीत’ बताते हुए कहा कि ‘ये सिर्फ महिलाओं का विकास नहीं, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास है।’ 

गौरतलब है कि 2021 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद UPSC ने NDA के लिए लड़कियों को आवेदन की इजाजत दी थी। 2022 में NDA के 148वें कोर्स में पहली बार 19 महिला कैडेट्स को एडमिशन मिला था, जिनमें 10 आर्मी के लिए, 6 एयरफोर्स और 3 नेवी के लिए चुनी गई थीं। इनमें से दो ने ट्रेनिंग के दौरान रिजाइन कर दिया। यानी अब जो 17 बेटियां पासआउट हुई हैं, वो वही हैं जिन्होंने अगस्त 2022 में NDA जॉइन किया था और तीन साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद 300 से ज्यादा पुरुष कैडेट्स के साथ पासआउट हुई हैं।

शानदार प्रदर्शन करने वाली बेटियां

इतिहास रचने वाली डिवीजन कैडेट शृति दक्ष वो पहली महिला बनीं जिन्हें BA स्ट्रीम में टॉप करने पर चीफ ऑफ एयर स्टाफ ट्रॉफी और सिल्वर मेडल से नवाजा गया। खास बात ये रही कि शृति के पापा भी NDA से हैं और उसी स्क्वॉड्रन से पासआउट हुए थे।

बाकी टॉपर्स में शामिल रहे:

लकी कुमार- Chief of Army Staff Trophy (B.Sc. टॉपर)

प्रिंस कुमार कुशवाहा- Chief of Naval Staff Trophy (Computer Science टॉपर)

उदयवीर सिंह नेगी- B.Tech टॉपर और परेड कमांडर

NDA में एडमिशन से लेकर ग्रेजुएशन तक

NDA में एडमिशन लेना लाखों लड़कों-लड़कियों का सपना होता है, लेकिन ये सपना हकीकत बनता है UPSC के NDA/NA एग्जाम पास करने के बाद। UPSC एक कॉमन एग्जाम लेती है, फिर SSB इंटरव्यू होता है। इस पूरे प्रोसेस में किसी राज्य या यूनियन टेरिटरी के लिए कोई कोटा नहीं होता।

यहां सुबह 4 बजे की दौड़ से लेकर रात तक की थकावट भरी क्लासेस, सब कुछ एक नई जिंदगी के लिए तैयार करता है।

NDA में ट्रेनिंग 6 टर्म्स की होती है यानी पूरे 3 साल की। हर साल दो टर्म्स होती हैं- स्प्रिंग (जनवरी से मई) और ऑटम (जुलाई से दिसंबर)। इस दौरान कैडेट्स को BA, BSc और B.Tech जैसे कोर्स में पढ़ाई करवाई जाती है और अंत में उन्हें JNU (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) से ग्रेजुएशन डिग्री मिलती है।

पासिंग आउट के बाद कहां और कैसे होती है पोस्टिंग?

तीन साल NDA की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद हर कोर्स के लिए एक पासिंग आउट परेड होती है। इसके बाद कैडेट्स अपनी-अपनी सेवा शाखा की प्री-कमीशनिंग एकेडमीज में जाते हैं। आर्मी वाले IMA देहरादून, नेवी वाले INA एझिमाला और एयरफोर्स वाले AFA डुंडीगल जाते हैं। वहां वो एक साल की और ट्रेनिंग करते हैं और फिर राष्ट्रपति द्वारा कमीशन मिलने के बाद भारतीय सेना के अधिकारी बनते हैं।

NDA की ट्रेनिंग पूरी तरह से जेंडर न्यूट्रल होती है। हां, कुछ फिजिकल एक्टिविटीज में लड़कियों की बॉडी स्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए हल्के बदलाव किए गए हैं, लेकिन ट्रेनिंग का स्तर और चुनौती बराबर है।

इन तीन सालों ने इन बेटियों को न सिर्फ एक अफसर बल्कि एक मजबूत और जांबाज इंसान बना दिया है, जो अब देश की सरहदों की हिफाजत करेंगी। और अब वक्त है कि पाकिस्तान भी भारत की इन शेरनियों की ताकत देखे।

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