Flight Ticket Refund: कई बार ऐसा होता है कि जल्दबाज़ी में फ्लाइट टिकट बुक कर ली और कुछ घंटों बाद प्लान बदल गया। पहले ऐसे मामलों में कैंसिलेशन चार्ज चुकाना पड़ता था, लेकिन अब यात्रियों के लिए राहत की खबर है। विमानन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयर टिकट रिफंड नियमों में अहम बदलाव किया है।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, अब यात्री टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उसे कैंसिल या बदल सकते हैं, हालांकि कुछ शर्तें लागू रहेंगी।
48 घंटे का 'लुक-इन ऑप्शन', क्या है यह नई सुविधा?
DGCA ने संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (CAR) 24 फरवरी को जारी किया। इसके तहत एयरलाइंस को यात्रियों को 48 घंटे का 'लुक-इन ऑप्शन' देना होगा। इस अवधि में यात्री बिना एक्स्ट्रा चार्ज के टिकट कैंसिल या बदल सकता है। हालांकि अगर आप फ्लाइट बदलते हैं, तो नई टिकट का मौजूदा किराया लागू होगा।
लेकिन यह सुविधा हर मामले में लागू नहीं होगी। अगर घरेलू उड़ान की तारीख बुकिंग से 7 दिन से कम है या इंटरनेशनल उड़ान की तारीख बुकिंग से 15 दिन से कम है, तो यह नियम लागू नहीं होगा। साथ ही यह सुविधा तब मिलेगी जब आपने टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से बुक किया हो।
नाम गलत हो गया? अब एयरलाइन नहीं वसूलेगी जुर्माना
नए नियमों में एक और अहम बदलाव किया गया है। अगर आपने एयरलाइन की अपनी वेबसाइट से टिकट बुक किया है और 24 घंटे के भीतर उसी यात्री के नाम में कोई छोटी गलती पाई जाती है, तो एयरलाइन नाम सुधारने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकती। यह राहत उन यात्रियों के लिए खास है, जिनसे टाइपिंग मिस्टेक हो जाती है।
एजेंट के जरिए बुक किया है टिकट? तो भी रिफंड की गारंटी
कई बार यात्री ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल्स से टिकट बुक करते हैं और रिफंड के लिए उनके चक्कर काटते रहते हैं। DGCA ने साफ कर दिया है कि रिफंड की जिम्मेदारी पूरी तरह से एयरलाइन की होगी, क्योंकि एजेंट उनके ही प्रतिनिधि होते हैं। साथ ही, रिफंड की प्रक्रिया 14 वर्किंग डेज के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।
मेडिकल इमरजेंसी में बड़ी राहत
नए नियमों में मेडिकल इमरजेंसी को लेकर भी प्रावधान जोड़ा गया है। अगर यात्रा अवधि के दौरान यात्री या उसी PNR पर दर्ज परिवार के सदस्य को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो एयरलाइन रिफंड या क्रेडिट शेल (जिसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके) देने का विकल्प दे सकती है।
अन्य मेडिकल मामलों में रिफंड तभी मिलेगा जब एयरलाइन के एयरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ या DGCA द्वारा सूचीबद्ध विशेषज्ञ यह राय देंगे कि यात्री यात्रा करने में सक्षम नहीं है।
नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
टिकट रिफंड का मुद्दा दिसंबर 2025 में उस समय चर्चा में आया था जब इंडिगो की उड़ानों में बाधाएं आई थीं। तब नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तय समय में रिफंड पूरा करने के निर्देश दिए थे।
आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में एयरलाइंस को 29,212 यात्री शिकायतें मिलीं, जिनमें से 7.5% शिकायतें रिफंड से जुड़ी थीं। उसी महीने घरेलू एयरलाइंस ने 1.43 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराई।
साल 2025 में कुल मिलाकर 16.69 करोड़ यात्रियों ने घरेलू उड़ानों से सफर किया। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट्स में से एक है, ऐसे में यात्रियों का भरोसा बनाए रखने के लिए ये नियम बेहद जरूरी थे।
समय-सीमा का रखें ध्यान
DGCA ने यह भी स्पष्ट किया है कि 48 घंटे की समय-सीमा खत्म होने के बाद यह विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। उसके बाद यात्रियों को नियमित कैंसिलेशन चार्ज देना होगा।
नए रिफंड नियमों से साफ है कि DGCA यात्रियों के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रहा है। 48 घंटे की छूट और नाम सुधार की सुविधा से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।