मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाले 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होने की उम्मीद है। यह समझौता दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। शिखर सम्मेलन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी मेजबानी करेंगे। इसके अलावा, दोनों यूरोपीय नेताओं ने 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में हिस्सा लिया जो पहली बार हुआ है।
यूक्रेन-रूस युद्ध पर भी होगी चर्चा
शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा व्यापार, सुरक्षा, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा ने कहा कि भारत उनके लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है और दोनों पक्ष नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। इस मौके पर दोनों देशों के नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जैसे कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, यूक्रेन-रूस युद्ध और मध्य-पूर्व की स्थिति।
2007 में शुरू हुई थी बातचीत
व्यापार समझौते की बात करें तो यह दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापारिक समझौता माना जा रहा है। इस पर बातचीत मूल रूप से 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन रुक गई थी। लगातार राजनयिक प्रयासों के बाद इसे 2022 में फिर से शुरू किया गया। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार और आर्थिक सुरक्षा के लिए ईयू आयुक्त मारोस सेफकोविच से बैठक के बाद सकारात्मक परिणाम की उम्मीद जताई। दोनों पक्ष पिछले एक साल में दस बार व्यक्तिगत रूप से मिले हैं, जो इस समझौते की गंभीरता और महत्व को दर्शाता है।
क्या रहेंगे अहम मुद्दे
क्या रहेंगे अहम मुद्दे शिखर सम्मेलन में सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को औपचारिक रूप देना, छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही के लिए मोबिलिटी फ्रेमवर्क स्थापित करना और सूचना सुरक्षा समझौते को अंतिम रूप देना जैसे कई अहम मुद्दे शामिल हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी चर्चा ईयू-भारत संबंधों में नया अध्याय लिखेगी। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी और सहयोग को और मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है।