खालिद से इमाम तक, सबने जानबूझकर रची थी दंगे की साजिश... हाई कोर्ट ने खारिज कर दी सबकी जमानत याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े 2020 के मामले में शरजील इमाम, उमर खालिद और सात अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि सुनियोजित साजिश के तहत देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करने की योजना थी।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड2 Sep 2025, 05:28 PM IST
दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम। (फाइल फोटो)
दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम। (फाइल फोटो)(Mint)

वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में शरजील इमाम, उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान सहित 9 आरोपियों को दिल्ली हाई कोर्ट से तगड़ झटका लगा है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शलिंदर कौर की हाई कोर्ट खंडपीठ ने इन सभी की जमानत याचिकाएं मंगलवार को खारिज कर दीं। कोर्ट ने यह फैसला लंबी सुनवाई के बाद दिया। इससे पहले 9 जुलाई को कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।

यह सिर्फ विरोध नहीं, साजिश थी: सॉलिसिटर जनरल

सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में जोर देकर कहा कि यह कोई सामान्य आंदोलन नहीं था। उन्होंने दावा किया कि इन आरोपियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान जानबूझकर 'चक्का जाम' और हिंसा की योजना बनाई थी, ताकि भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल की जा सके।

शरजील इमाम के भाषणों पर तीखी टिप्पणी

शरजील इमाम के भाषणों का हवाला देते हुए एसजी ने कहा कि उन्होंने पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात कही थी। कोर्ट में यह भी कहा गया कि शरजील ने अपने भाषण में कथित तौर पर कहा था, 'जब तक 100-200 लोग नहीं मरेंगे, तब तक कुछ नहीं होगा।' अदालत ने इसे गंभीर और भड़काऊ माना।

गवाहों के बयानों ने जोड़ी साजिश की कड़ियां

अभियोजन पक्ष ने संरक्षित गवाहों के बयानों का जिक्र करते हुए बताया कि इन सभी आरोपियों के बीच आपसी तालमेल था। एक गवाह ने दावा किया कि उमर खालिद के साथ बैठक में हिंसा की योजना पर चर्चा हुई थी। वहीं, एक अन्य गवाह के अनुसार सीसीटीवी कैमरे बंद करवाने की भी साजिश रची गई थी, ताकि सबूत न मिल सकें।

दंगों की फंडिंग और तैयारियां

सरकारी वकील ने बताया कि ताहिर हुसैन, इशरत जहां, अब्दुल खालिद सैफी, शिफा-उर-रहमान और मीरान हैदर जैसे आरोपियों ने दंगों के लिए फंडिंग की। आरोप लगाया गया कि ताहिर हुसैन ने अपने 'सफेद पैसे' को 'काले धन' में बदलकर हिंसा को आर्थिक मदद दी।

UAPA के तहत मामला, ट्रायल में देरी पर भी नहीं मिली राहत

बचाव पक्ष ने कोर्ट से कहा था कि मामले में ट्रायल में देरी हो रही है, अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं। लेकिन हाईकोर्ट ने साफ किया कि UAPA जैसे गंभीर मामलों में केवल ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।

कुछ को मिली थी पहले जमानत

जहां एक ओर नौ आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हुई, वहीं देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को 2021 में हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। इशरत जहां को ट्रायल कोर्ट से राहत मिली थी।

2020 में हुआ था बड़ा दंगा, 53 लोगों की गई थी जान

यह मामला उस बड़ी साजिश से जुड़ा है, जिसमें फरवरी 2020 में पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस दंगे में 53 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने 700 से ज्यादा FIR दर्ज की थीं और 18 आरोपियों को UAPA के तहत चार्जशीट किया है।

इनमें उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई अन्य लोगों पर कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में जानबूझकर हिंसा भड़काने का आरोप है।

मामले की अगली सुनवाई और क्या होगा आगे?

फिलहाल यह मामला आरोप तय करने की बहस के स्तर पर है। दो आरोपी अभी भी फरार हैं। आने वाले दिनों में इस केस में कोर्ट की हर हलचल पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह मामला देश की न्यायपालिका और लोकतंत्र की कसौटी भी बना हुआ है।

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