Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस के मौके पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। भारत में ऐसे कई अचीवर्स हैं, जो देश का नाम रोशन कर रहे हैं। शुभांशु शुक्ला की कामयाबी की उड़ान का किस्सा चारों तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर शुक्ला को शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया।
गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस बहादुर IAF अधिकारी से अंतरिक्ष यात्री बने शुभांशु शुक्ला के लिए अशोक चक्र को मंजूरी दी थी। इसी के साथ, शुभांशु भारत के सबसे सम्मानित शांति काल का वीरता पुरस्कार पाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए।
शुभांशु शुक्ला की कहानी बताती है कि हिम्मत सिर्फ युद्ध के मैदानों के लिए नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों के लिए भी है। लखनऊ के एक युवा सपने देखने वाले से लेकर एक स्पेसक्राफ्ट के कंट्रोल तक शुक्ला की यात्रा भारत के अंतरिक्ष सपनों के लिए एक टर्निंग पॉइंट से कम नहीं है।
14 दिन अंतरिक्ष स्टेशन पर रहे शुभांशु शुक्ला
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला हाल ही में अंतरिक्ष स्टेशन पर 14 दिन बिताकर आए हैं, वो एक्सिओम 4 मिशन का हिस्सा थे। अंतरिक्ष में जाने के पहले शुभांशु शुक्ला दो महीने तक क्वारंटीन रहे थे और लंबी ट्रेनिंग के कारण करीब वो एक साल से अपनी पत्नी से दूर थे। ऐसे में जब वो अमेरिकी पहुंचीं थीं तो पति को गले से लगा लिया था। उस इमोशनल पल को शुभांशु शुक्ला ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा भी किया था।
शुभांशु शुक्ला की कामना से हुई शादी
अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला की पत्नी डॉक्टर कामना शुक्ला डेंटिस्ट हैं। लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल में दोनों लंबे वक्त तक साथ पढ़े हैं। स्कूल में ही दोनों के बीच प्यार हुआ और फिर साल 2009 में शादी के बंधन में बंध गए। बता दें कि अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है जो सैनिकों और नागरिकों को असाधारण बहादुरी, साहस या सर्वोच्च बलिदान के लिए दिया जाता है।
(वार्ता की खबर से इनपुट के साथ)