Goa Congress Crisis: गोवा कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कुछ फैसलों के बाद कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने संगठन में संवाद, सम्मान और भागीदारी को लेकर सवाल उठाए हैं। शमीला सिद्दीकी के निलंबन और लंबे समय से पार्टी से जुड़े वसीम खान को हटाए जाने के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष की आवाजें तेज हो गई हैं।
पार्टी से मिली जानकारी के मुताबिक, गोवा कांग्रेस की राज्य सोशल मीडिया को-ऑर्डीनेटर शमीला सिद्दीकी को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, करीब 20 साल से कांग्रेस के लिए काम कर रहे वसीम खान को भी पार्टी से हटा दिया गया। इन दोनों फैसलों के बाद कई कार्यकर्ताओं ने नाराजगी और चिंता जताई है।
कैसे शुरू हुआ ये विवाद?
ये विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेतृत्व ने अमित पाटकर की जगह गिरिश चोडणकर को दोबारा गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया। इस फैसले से पार्टी के कुछ कार्यकर्ता असहमत दिखाई दिए।अब सवाल सिर्फ शमीला सिद्दीकी या वसीम खान का नहीं है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय के वे लोग, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया, क्या उन्हें संगठन में बराबर सम्मान और अपनी बात रखने का मौका मिल रहा है?
कार्यकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप
4 जुलाई 2026 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल गोवा आए थे। कई कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि वे नेतृत्व में हुए बदलाव और अपनी चिंताओं पर उनसे बात कर पाएंगे। लेकिन कुछ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। इस घटना ने कांग्रेस में आंतरिक कामकाज को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अल्पसंख्यक समुदाय लंबे समय से कांग्रेस का समर्थन करते आए हैं। ऐसे में कुछ कार्यकर्ताओं का सवाल है कि यदि ये समुदाय पार्टी के साथ खड़ा रहा है, तो उसकी चिंताओं को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा? अगर लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं पर सवाल उठाने के बाद कार्रवाई होती है, तो इसका बाकी कार्यकर्ताओं पर क्या असर पड़ेगा? कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का ये भी मानना है कि अहमद पटेल के निधन के बाद पार्टी में अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज पहले जितनी मजबूत नहीं रही है।