Goa Police High-Tech: क्या है PRISM? साइबर ठगों पर कसेगा लगाम, गोवा पुलिस करेगी सीधा वार

गोवा पुलिस ने PRISM और ई-जीरो एफआईआर सिस्टम जैसी नई तकनीकों को लागू किया है, जो साइबर अपराधों पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद करती हैं। यह नागरिक सुरक्षा को सशक्त बनाती हैं और डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाती हैं…

Anuj Shrivastava
अपडेटेड6 Feb 2026, 06:21 PM IST
गोवा पुलिस हुई हाई‑टेक
गोवा पुलिस हुई हाई‑टेक

What is PRISM: गोवा पुलिस ने लोगों की सुरक्षा बढ़ाने और साइबर अपराधों पर जल्दी और असरदार कार्रवाई करने के लिए नई तकनीकें शुरू की हैं। इनमें PRISM (केंद्रीकृत इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर) और ई-जीरो एफआईआर सिस्टम शामिल हैं, जिन्हें 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन से जोड़ा गया है।

क्या है PRISM?

PRISM एक एडवांस्ड प्लेटफॉर्म है, जो सभी अधिकृत टेक्निकल और एनालिटिकल टूल्स को एक जगह जोड़ता है। यह इंटेलिजेंस-बेस्ड पुलिसिंग को मजबूत बनाता है और आदतन अपराधियों, फरार आरोपियों और लापता लोगों की पहचान व निगरानी में मदद करता है। वहीं ई-ज़ीरो एफआईआर सिस्टम के जरिए साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों को तुरंत एफआईआर में बदला जाता है, जिससे जांच में देरी खत्म होती है और पीड़ितों को जल्दी न्याय मिल सके।

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि PRISM और ई-जीरो एफआईआर जैसी पहलों के माध्यम से गोवा पुलिस नागरिक सुरक्षा को सशक्त बना रही है। ये स्मार्ट, टेक्नोलॉजी-बेस्ड और नागरिक-फ्रेंडली पुलिसिंग का मॉडल है, जिसे दूसरे राज्य भी अपना सकते हैं। ये पहले सुरक्षित, संवेदनशील और मॉडर्न गवर्नेंस के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाती हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन से प्रेरित हैं।

PRISM से डीप इंटेलिजेंस एनालिसिस भी संभव

उत्तर गोवा के साइबर क्राइम पुलिस अधीक्षक राहुल गुप्ता ने बताया कि PRISM सभी अधिकृत टेक्निकल टूल्स को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर डीप इंटेलिजेंस एनालिसिस को संभव बनाता है। यह एक लगातार निगरानी करने वाली प्रणाली है, जिससे अपराधियों की पहचान, ट्रैकिंग और लापता लोगों की तलाश आसान होती है।

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इसके अलावा, डिजिटल टेनेंट वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए नागरिक अब गोवा पुलिस ऐप से पूरी तरह ऑनलाइन किरायेदार वेरिफिकेशन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में आधार कार्ड और किराया एग्रीमेंट जैसे डॉक्यूमेंट्स डिजिटल रूप से अपलोड किए जा सकते हैं। तीन-स्तरीय वेरिफिकेशन से पारदर्शिता, सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित होती है, साथ ही डिजिटल गवर्नेंस को भी मजबूती मिलती है।

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