Nursery Admission Fees: लग्जरी कार की EMI के बराबर है गुरुग्राम में नर्सरी की फीस! सुनकर उड़ जाएंगे होश, वायरल पोस्ट

Nursery admission Fees: एक महिला ने अपने बच्चे की नर्सरी फीस को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जो तेजी से वायरल हो गया। करीब 3.7 लाख सालाना फीस ने लोगों को चौंका दिया और महंगी पढ़ाई पर बहस छेड़ दी। अब यूजर्स इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड3 Apr 2026, 10:51 AM IST
नर्सरी की फीस सुनकर उड़ गए होश, लिंक्डइन पोस्ट वायरल (सांकेतिक तस्वीर)
नर्सरी की फीस सुनकर उड़ गए होश, लिंक्डइन पोस्ट वायरल (सांकेतिक तस्वीर)

Nursery Admission Fees: शहरों में रहना पहले ही महंगा था, लेकिन अब बच्चों की शुरुआती पढ़ाई भी लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगी है। हाल ही में एक लिंक्डइन पोस्ट ने मिडिल क्लास और हाई-प्रोफाइल पैरेंट्स के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। मामला है नर्सरी एडमिशन की फीस का, जो किसी बड़े कॉलेज की डिग्री से भी ज्यादा नजर आ रही है।

एक क्वार्टर में 1.24 लाख फीस

'द पीपल स्टूडियो' की फाउंडर पूजा सेठिया ने सोशल मीडिया पर अपने बच्चे के स्कूल का फीस स्ट्रक्चर शेयर किया। यह कोई मजाक नहीं था, बल्कि 2026-27 के शैक्षणिक सत्र का असली हिसाब-किताब था। इस स्क्रीनशॉट के मुताबिक, जुलाई से मार्च के बीच उन्हें हर तीन महीने (एक क्वार्टर) में 1,24,780 चुकाने हैं।

अगर साल भर का हिसाब लगाएं, तो यह रकम करीब 3.7 लाख बैठती है। पूजा ने मजाकिया लहजे में लिखा, “इतने पैसे में तो मैं बच्चे को घर पर पढ़ाकर यह रकम SIP में डाल दूं। कम से कम जब वो बड़ा होगा, तो उसके पास एक अच्छा खासा फंड होगा, भले ही उसकी हैंडराइटिंग थोड़ी खराब रह जाए।”

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नर्सरी की फीस सुनकर उड़ गए होश, 3.7 लाख सालाना ने छेड़ी पढ़ाई की महंगाई पर बहस
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सोशल मीडिया रिएक्शन

इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने तुलना करते हुए कहा कि इतनी फीस में उन्होंने अपनी पूरी ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरी कर ली थी। वहीं कई यूजर्स ने गुरुग्राम की फीस स्ट्रक्चर को “नॉर्मल” बताते हुए कहा कि यहां फीस पर ज्यादा रेगुलेशन नहीं है, इसलिए स्कूल अपनी मर्जी से फीस तय करते हैं। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब AI का दौर आ रहा है, तो क्या इतनी महंगी डिग्रियों की वैल्यू भविष्य में उतनी ही रहेगी?

होम स्कूलिंग का उठा मुद्दा

इस बहस के बीच होम स्कूलिंग का मुद्दा भी जोर पकड़ने लगा। एक यूजर ने कहा कि स्कूल में पढ़ाई जाने वाली 90% चीजें बाद में काम नहीं आतीं और बेसिक चीजें घर पर भी सिखाई जा सकती हैं। उनका मानना है कि बच्चों को स्पोर्ट्स और प्रैक्टिकल स्किल्स सिखाना ज्यादा जरूरी है, बजाय सिर्फ किताबों पर फोकस करने के।

महंगा स्कूल- चॉइस या मजबूरी

हालांकि, सभी लोग इस महंगाई को लेकर एकमत नहीं थे। एक यूजर ने साफ कहा कि महंगे स्कूल में पढ़ाना एक चॉइस है, मजबूरी नहीं। उनका कहना था कि सस्ते और अच्छे स्कूल भी मौजूद हैं, लेकिन लोग अक्सर समाज को दिखाने या स्टेटस के लिए महंगे स्कूल चुनते हैं। कुछ ने तो यह तक कहा कि अगर आप फीस जानते हुए भी स्कूल चुनते हैं, तो बाद में शिकायत करना सही नहीं है।

यह पूरा मामला एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है- शहरी भारत में शिक्षा का बढ़ता खर्च। जहां एक तरफ लोग बेहतर सुविधाओं और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की पढ़ाई चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ इसकी कीमत भी तेजी से बढ़ रही है। यह उस बदलते भारत की तस्वीर दिखाती है, जहां शिक्षा भी एक बड़ा निवेश बन चुकी है। अब सवाल यह है कि आने वाले समय में माता-पिता महंगी पढ़ाई और स्मार्ट विकल्प के बीच कैसे संतुलन बनाएंगे।

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