Air India news: एयर इंडिया पैसेंजर को खाने में मिला था बाल, 23 साल बाद जीत गया केस

Air India flight case: 23 साल पुराने केस में एक यात्री पी. सुंदरपरिपोरानम को आखिरकार इंसाफ मिल गया है। एयर इंडिया की फ्लाइट में दूषित भोजन परोसने के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने 35 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने एयरलाइन की लापरवाही मानी, लेकिन मेडिकल सबूत न होने से जुर्माना घटा दिया।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड23 Oct 2025, 12:34 PM IST
जब एयर इंडिया फ्लाइट के खाने में यात्री को मिला बाल, 23 साल बाद जीती कानूनी लड़ाई (सांकेतिक तस्वीर)
जब एयर इंडिया फ्लाइट के खाने में यात्री को मिला बाल, 23 साल बाद जीती कानूनी लड़ाई (सांकेतिक तस्वीर)

Air India flight case: कहते हैं कि अगर इंसान सच के लिए डटा रहे, तो देर भले हो लेकिन इंसाफ जरूर मिलता है। ऐसा ही हुआ एक यात्री के साथ जिसने 23 साल पहले एयर इंडिया की फ्लाइट में परोसे गए खाने के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। अब मद्रास हाईकोर्ट ने इस लंबे इंतजार के बाद उन्हें 35 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया है।

कैसे शुरू हुआ मामला?

ये मामला 26 जुलाई 2002 का है, जब यात्री पी. सुंदरपरिपोरानम एयर इंडिया की फ्लाइट IC 574 से कोलंबो से चेन्नई जा रहे थे। फ्लाइट में उन्हें जो खाना परोसा गया, उसमें बंद पैकेट के अंदर बाल निकले। ये देखकर उन्हें उल्टी जैसा महसूस हुआ और उन्होंने तुरंत शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन न तो कोई शिकायत फॉर्म था और न ही स्टाफ ने उनकी बात सुनी।

बीमारी और शिकायत की प्रक्रिया

लैंड करने के बाद उन्होंने एयर इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर (कमर्शियल) को लिखित शिकायत दी। एयर इंडिया ने 12 जुलाई को पत्र लिखकर खेद जताया और जांच की बात कही, लेकिन यात्री इससे संतुष्ट नहीं हुए। 19 जुलाई को उन्होंने अपने वकील के जरिए कानूनी नोटिस भेजा और बताया कि इस घटना से उन्हें पेट दर्द और उल्टियां हुईं। उन्होंने 11 लाख का मुआवजा मांगा था।

एयर इंडिया ने दिया था ये जवाब

एयर इंडिया ने जवाब में कहा कि सुंदरपरिपोरानम उनके नियमित यात्री हैं और ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि केटरिंग का काम चेन्नई के फाइव स्टार होटल एम्बेसडर पल्लवा को दिया गया था। इसलिए अगर यात्री ने होटल को केस में शामिल नहीं किया, तो एयर इंडिया जिम्मेदार नहीं मानी जा सकती। एयरलाइन ने यहां तक कहा कि शायद खाने में जो बाल था, वो यात्री या फिर सह-यात्री का ही हो सकता है।

ट्रायल कोर्ट और फिर हाईकोर्ट का फैसला

ट्रायल कोर्ट ने पहले एयर इंडिया को यात्री को 1 लाख देने का आदेश दिया, लेकिन एयरलाइन ने इस फैसले के खिलाफ अपील कर दी। आखिरकार, 10 अक्टूबर 2025 को मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एयर इंडिया इस घटना से इनकार नहीं कर सकी। अदालत ने माना कि एयरलाइन की जिम्मेदारी थी कि वह यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन दे।

हालांकि, कोर्ट ने 1 लाख का जुर्माना रद्द कर दिया क्योंकि यात्री ने कोई चिकित्सीय सबूत नहीं दिया कि उन्हें नुकसान हुआ। लेकिन कोर्ट ने कहा कि एयर इंडिया को मुकदमे का खर्च, कोर्ट फीस और वकील की फीस समेत कुल 35,000 चार हफ्तों में चुकाने होंगे।

भले ही रकम छोटी हो, लेकिन यह फैसला यात्रियों के अधिकारों की बड़ी जीत है। यह दिखाता है कि चाहे कितना भी समय लगे, अगर मामला सही है तो न्याय जरूर मिलता है।

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