Harivansh Rai Bachchan Birth Anniversary: कुछ रचनाएं ऐसी होती हैं, जिनको सिर्फ पढ़ा नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है। हिंदी साहित्य के ऐसे ही बेहतरीन कवि थे हरिवंश राय बच्चन। उनकी मशहूर कविता ‘मधुशाला’ आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह उतरती है, जैसे दशकों पहले उतरती थी। 27 नवंबर 1907 को यूपी के प्रतापगढ़ जिले के बाबूपट्टी गांव में जन्मे बच्चन जी को उनकी मस्तीभरी लेखनी, गहराई और बेहद आसान शब्दों में बड़ी बात कह देने की कला के लिए याद किया जाता है।
हुआ था ‘मधुशाला’ का विरोध
अमिताभ बच्चन ने सालों पहले कौन बनेगा करोड़पति (KBC 16) में बताया था कि जब उनके पिता ने मधुशाला लिखी, तब इसे लेकर काफी विरोध हुआ। कई लोग मान बैठे थे कि ये कविता युवाओं को शराब पीने के लिए उकसा रही है।
अमिताभ बच्चन ने कही थी ये बात
अमिताभ बच्चन ने बताया, “जब मधुशाला लिखी गई थी, तब इस पर काफी विरोध हुआ था। लोगों का कहना था कि इससे युवाओं को शराब पीने की तरफ बढ़ावा मिल रहा है। विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया था कि बात गांधी जी तक पहुंच गई। लोग कह रहे थे कि एक नौजवान कवि युवाओं को शराब की तरफ ले जा रहा है।”
उन्होंने आगे बताया, “एक बार ऐसा मौका आया जब मेरे पिताजी और गांधीजी एक ही जगह मौजूद थे। गांधीजी ने उन्हें बुलाया और पूछा, ‘बताइए, आपने क्या लिखा है?’ फिर मेरे पिता ने उनके सामने मधुशाला सुनाई। सुनने के बाद गांधीजी ने कहा, ‘इसमें तो कोई खराबी नहीं है।’ और बस इसी तरह मेरे पिताजी उस पूरे विवाद से बच गए।”
शराब छूई भी नहीं फिर ‘मधुशाला’ कैसे लिखी?
अमिताभ बच्चन आगे बताते हैं, “मेरे पिता ने कभी शराब नहीं पी, फिर भी उन्होंने मधुशाला जैसी रचना लिखी। लोग अक्सर उनसे पूछते थे कि ‘आप शराब पीते नहीं, फिर इसके बारे में इतना गहराई से कैसे लिख दिया?’ वो अलग-अलग तरीकों से समझाने की कोशिश करते थे। आखिरकार उन्होंने मधुशाला में ही इस जिज्ञासा का जिक्र किया है कि लोग कैसे पूछते हैं कि बिना अनुभव किए आपने यह सब कैसे लिखा।”
एक बेटे की भावुक श्रद्धांजलि
अपने पिता की 118वीं जयंती पर अमिताभ बच्चन ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया पर उनकी पंक्तियां साझा करते हुए लिखा, “मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षण भर जीवन, मेरा परिचय।” आज भी बच्चन जी की कविताएं पीढ़ियों को जोड़ती हैं, समझाती हैं और बहुत कुछ महसूस कराती हैं।