हिमाचल प्रदेश में लगातार कुदरत अपना कहर बरपा रहा है , लगातार हो रही बारिश से प्रदेश के लोगों के साथ ही वहां की बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ है।
प्रदेश के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, 31 जुलाई को सुबह 10:00 बजे तक कुल 301 सड़कें अवरुद्ध हैं, 436 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (डीटीआर) बाधित हैं, और 254 जलापूर्ति योजनाएँ प्रभावित हुई हैं।
170 लोगों की मौत
एसईओसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 जून से शुरू हुए चालू मानसून सीज़न में अब तक 170 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 94 मौतें भूस्खलन, अचानक बाढ़, बादल फटने और बिजली के झटके जैसी वर्षाजनित घटनाओं के कारण हुई हैं, जबकि 76 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए हैं।
मंडी ज़िले में वर्षाजनित दुर्घटनाओं में सबसे अधिक (21) मौतें हुई हैं, उसके बाद कांगड़ा (19) और कुल्लू (10) का स्थान है।
बुनियादी ढांचे को पहुंचा नुकसान
वर्षाजनित विनाश ने 400 से अधिक घरों, 1,627 गौशालाओं और सड़कों, बिजली लाइनों और जल प्रणालियों सहित सार्वजनिक संपत्ति के महत्वपूर्ण हिस्सों को भी नुकसान पहुँचाया है। उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने कहा कि “हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मानसून सीजन की शुरुआत से अब तक 48 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसमें 17 लोगों की मौत की खबर है।”
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र
एसईओसी ने निवासियों से सतर्क रहने और जब तक बहुत ज़रूरी न हो, यात्रा करने से बचने की अपील की है, खासकर भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आशंका वाले उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने के सलाह दी है पुनर्निर्माण कार्य जारी है, लेकिन लगातार बारिश से पुनर्निर्माण कार्यों में चुनौतियाँ आ रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रतिक्रिया दल तैनात किए गए हैं।
इससे पहले, एसईओसी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि मानसून के कहर से सार्वजनिक और निजी संपत्ति को 1,59,981 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसमें 2,743 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं, 680 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और 22,900 से अधिक पशुधन की हानि हुई है।