रेंट एग्रीमेंट की मियाद खत्म होने के बाद किराएदार को कितने दिनों में निकाल सकता है मकान मालिक?

लीज एग्रीमेंट खत्म हो गया, फिर भी मकान मालिक ने किराएदार को निकाला नहीं। किराएदार मकान में रह रहा था और मकान मालिक उससे किराया वसूल रहा था। फिर मकान मालिक ने अचानक किराएदार को नोटिस दे दिया। 

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड4 Feb 2026, 10:30 PM IST
ओडिशा हाई कोर्ट ने किराए के मकान पर दिया फैसला (सांकेतिक तस्वीर)
ओडिशा हाई कोर्ट ने किराए के मकान पर दिया फैसला (सांकेतिक तस्वीर)(pexels)

मकान मालिक और किराएदार के विवाद अक्सर देखने-सुनने को मिल जाते हैं। एक ऐसा ही मामला ओडिशा हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला किराएदार के पक्ष में दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक का नोटिस कानूनी नहीं है, इसलिए किराएदार घर खाली नहीं करेगा।

मकान मालिक और किराएदार का विवाद जानिए

दरअसल, मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद इस बात का था कि मकान मालिक ने मकान खाली करने के लिए उचित समय नहीं दिया। मकान मालिक और किराएदार ने रेंट/लीज अग्रीमेंट बनाया था, लेकिन उसकी मियाद खत्म हो गई। दोनों ने अग्रीमेंट को रीन्यू नहीं कराया। ऐसी स्थिति में ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1881 की धारा 106(1) कहती है कि रेंट अग्रीमेंट अब महीना दर महीना के हिसाब से लागू होगा। ऐसे में जब मकान मालिक को घर खाली करवाना हो तो उसे किराएदार को कम से कम 15 दिन का वक्त देना होगा।

मकान मालिक ने दिया था 7 दिन का नोटिस

न्यूज वेबसाइट इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा हाई कोर्ट के पास जो मामला पहुंचा था, उसमें मकान मालिक ने किराएदार को घर खाली करने के लिए सिर्फ सात दिन दिए थे। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि मकान मालिक और किराएदार के बीच रेंट/लीज अग्रीमेंट की मियाद पूरी हो चुकी थी, फिर भी किराया लगा हुआ था, इसलिए अब किराएदार से मकान खाली करवाना है तो उसे 15 दिन का नोटिस देना होगा ना कि 7 दिन का।

किराए के मकान को लेकर क्या कहता है कानून?

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1881 की धारा 111(ए) कहती है कि अगर रेंट/लीज एग्रीमेंट लागू है तब मकान मालिक अपने किराएदार को मकान खाली करने का नोटिस उतने ही दिनों का देगा जितना अग्रीमेंट में लिखा हुआ है। चूंकि इस मामले में एग्रीमेंट लागू नहीं था, फिर भी मकान मालिक किराएदार से किराया लेता रहा, इसलिए धारा 111(ए) की जगह धारा 106(1) लागू हो गई।

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 106(1) को जानिए

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1881 की धारा 106(1) कहती है, 'किसी कॉन्ट्रैक्ट या स्थानीय कानून या रिवाज की गैरमौजूदगी में, खेती या मैन्युफैक्चरिंग के मकसद से अचल संपत्ति की लीज को साल-दर-साल की लीज माना जाएगा, जिसे लीज देने वाला या लीज पर लेने वाला, दोनों में से कोई भी छह महीने के नोटिस पर खत्म कर सकता है; और किसी दूसरे मकसद के लिए अचल संपत्ति की लीज को महीने-दर-महीने की लीज माना जाएगा, जिसे लीज देने वाला या लीज लेने वाला, दोनों में से कोई भी पंद्रह दिन के नोटिस पर खत्म कर सकता है।'

मकान मालिक के लिए बड़ी सीख

चूंकि यहां लीज पर दी गई जगह खेती या मैन्युफैक्चरिंग के लिए नहीं थी बल्कि वह आवास के लिए थी, इसलिए महीना-दर-महीना लीज का प्रावधान लागू हुआ जिसके लिए नियम स्पष्ट है कि ऐसी जगह को खाली करवाने के लिए 15 दिन का नोटिस देना होगा। मकान मालिक ने यहीं गलती कर दी और किराएदार कानून की नजर में सही साबित हो गया। ओडिशा हाई कोर्ट ने किराएदार के पक्ष में वह फैसला 22 नवंबर, 2024 को दिया था।

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