अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी ठीक से नहीं दे पाया विपक्ष… लोकसभा में जगदंबिका पाल बोले- ओम बिरला ने नैतिकता दिखाई

Parliament News: लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है। चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सासंद गौरव गोगोई ने की। इससे पहले पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने सदन को स्पीकर ओम बिरला की उदारता से सदन का परिचय करवाया।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड10 Mar 2026, 01:39 PM IST
लोकसभा में पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल।
लोकसभा में पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल।

Lok Sabha News in Hindi: एक दिन की देरी से ही सही, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव सदन में पेश हो गया। बिहार के किशनगंज लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पीठासीन जगदंबिका पाल की अनुमति से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इससे पहले पीठासीन अध्यक्ष ने जगदंबिका पाल ने लोकसभा को बताया कि विपक्ष ने 10 फरवरी को जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया तो उसमें कई सारी ऐसी गलतियां थीं जिनके आधार पर नोटिस खारिज किया जा सकता था, लेकिन स्पीकर ने हर मौके पर उदारता दिखाई और गलतियों को ठीक करवाकर अपने ही खिलाफ लाए जाने वाले प्रस्ताव को अनुमोदित किया।

कितना लापरवाह है विपक्ष, जगदंबिका पाल ने बताईं सारी बातें

पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि सदन को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उदारता को अच्छी तरह जानना और समझना चाहिए। फिर उन्होंने 10 फरवरी को विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस में खामियों का जिक्र किया जो इस प्रकार हैं।

  • 10 फरवरी, 2026 को नोटिस आया था जिसमें केसी वेणुगोपाल और 119 सदस्यों का नाम था। लेकिन नोटिस में वर्ष 2026 की जगह 2025 लिखा था।
  • उस नोटिस में प्रस्ताव ही शामिल नहीं किया गया था।
  • बाद में प्रस्ताव जोड़ा गया तो उस पर किसी सदस्य का हस्ताक्षर नहीं था। फोटो सिग्नेचर था जो वैध नहीं था।
  • नोटिस के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले तीन प्रस्तावक हैं- मोहम्मद जावेद, के सुरेश और मल्लू रवि। लेकिन इनमें किसी एक का भी सिग्नेचर प्रस्ताव पर नहीं था।
  • बाद में स्पीकर ने इसकी अनुमति दी। अगर वह अनुमति नहीं देते तो प्रस्ताव एडमिशेबल नहीं हो सकता था।
  • किसी नोटिस के ग्राह्य होने की जो शर्तें हैं, वही पूरी नहीं हुईं। फिर भी लोकसभा अध्यक्ष ने नोटिस को अस्वीकार करने के बजाय अपने ऑफिस से कहा कि गलितयां ठीक करवा ले।
  • आज अध्यक्ष से कहा गया कि नोटिस मोहम्मद जावेद ने दिया, लेकिन बहस की शुरुआत वो नहीं करेंगे। अध्यक्ष ने इसे भी स्वीकार किया और हम गौरव गोगोई को बहस की शुरुआत करने की अनुमति दे रहे हैं।
  • 1954, 1966 और 1987 में भी तत्कालीन लोकसभा अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आए थे, लेकिन सभी सदन की कार्यवाही को संचालित करते रहे। पहली बार किसी लोकसभा अध्यक्ष ने उच्च नैतिक मानदंडों की स्थापना की और स्वयं ही फैसला किया कि जब तक उनके खिलाफ आए नोटिस का समाधान नहीं हो जाता, वो अपनी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।

गौरव गोगोई ने अविश्वास प्रस्ताव पर शुरू की चर्चा

पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल जब ये बातें सदन को बता रहे थे, तब भी कई विपक्षी सदस्य हंगामा कर रहे थे। इस पर पीठासीन अध्यक्ष ने कहा कि यह छोटी बात नहीं है, बल्कि यह स्पीकर ओम बिरला ने उदारता और नैतिकता के नए मानदंड स्थापित किए जिससे सदन को वाकिफ होना ही चाहिए। बहरहाल, पीठासीन अध्यक्ष के यह सब बताने के बाद स्पीकर के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत हो गई। पहले वक्ता के रूप में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपना भाषण शुरू किया।

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