
West Bengal Voter List 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजने ही वाला है, लेकिन उससे पहले वोटर लिस्ट को लेकर राज्य में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। आज, 28 फरवरी को राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जा रही है, जो स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद तैयार हुई है। यह कोई साधारण लिस्ट नहीं है, इसमें लाखों नाम हटाए गए हैं और लाखों पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। चुनाव से पहले यह लिस्ट कई मायनों में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें लाखों नामों को लेकर चर्चा और विवाद दोनों रहे हैं।
पिछले साल दिसंबर में जब ड्राफ्ट रोल आया था, तब एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। बंगाल के कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई। यानी करीब 58 लाख नाम लिस्ट से हटा दिए गए। चुनाव आयोग का कहना है कि ये वो लोग हैं जिनकी या तो मृत्यु हो चुकी है, जो कहीं और शिफ्ट हो गए हैं, या जिनके नाम डबल थे।
इस वोटर लिस्ट रिवीजन ने बंगाल में एक बड़े राजनीतिक युद्ध को जन्म दे दिया है। सत्ताधारी पार्टी TMC और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे 'पिछले दरवाजे से NRC लाने की कोशिश' करार दिया है। इतना ही नहीं, बल्कि ममता बनर्जी खुद 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं और मांग की कि 2026 के चुनाव पुरानी (2025 की) वोटर लिस्ट पर ही कराए जाएं।
उनका आरोप है कि विसंगतियों के नाम पर असली वोटर्स के नाम चोरी-छिपे हटाए गए हैं। दूसरी तरफ, बीजेपी (BJP) इस प्रक्रिया का पूरा समर्थन कर रही है, जबकि कांग्रेस और वामपंथियों ने इसके समय पर सवाल उठाए हैं।
भारत का सर्वोच्च न्यायलय सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया कि जिला जजों की मदद से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। कोर्ट ने 28 फरवरी तक ड्राफ्ट लिस्ट जारी करने की अनुमति दी और साथ ही चुनाव आयोग को पूरक सूची जारी करने की भी छूट दी है।
बात सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही। TMC का दावा है कि जब से 4 नवंबर को यह रिवीजन शुरू हुआ है, तब से करीब 120 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें वोट कटने के डर से किए गए सुसाइड और काम के दबाव में दम तोड़ने वाले बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भी शामिल हैं। हालांकि, बीजेपी ने इसे 'डर फैलाने की राजनीति' बताया है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह नागरिकता तय करने की प्रक्रिया नहीं है और जिनका नाम हटाया गया है, वे अपील कर सकते हैं।
वोट डालने जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका नाम लिस्ट में है या नहीं। आप घर बैठे इन तरीकों से चेक कर सकते हैं:
ECINET मोबाइल ऐप (Play Store/App Store)
चुनाव आयोग की वेबसाइट: www.voters.eci.gov.in
CEO बंगाल की वेबसाइट: www.ceowestbengal.wb.gov.in
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन, चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है जिसका मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट और सटीक बनाना है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने 24 जून को पूरे देश में इस प्रक्रिया की घोषणा की थी और अब तक 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया जा चुका है, जिनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है।
लोकतंत्र में आपका सबसे बड़ा अधिकार वोट है। लिस्ट से नाम कटना सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि आपकी आवाज खोने जैसा है। इसलिए विवादों के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाएं और तुरंत अपना नाम चेक करें। अगर नाम गायब है, तो तुरंत अपने BLO या चुनाव आयोग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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