कांग्रेस सांसद और लोकसभा में तिरुवनंतपुरम का प्रतिनिधित्व करने वाले शशि थरूर ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि वह वीर सावरकर पुरस्कार न तो स्वीकार करेंगे और न ही इससे जुड़े किसी समारोह में भाग लेंगे। थरूर ने कहा कि पुरस्कार के स्वरूप, इसे देने वाली संस्था और अन्य जरूरी तथ्यों को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। ऐसे में उनके नाम से पुरस्कार की घोषणा करना गैर-जिम्मेदाराना कदम है। उन्होंने कहा कि बिना उनकी सहमति के आयोजकों द्वारा उनका नाम सार्वजनिक किया जाना उचित नहीं है।
पुरस्कार स्वीकार नहीं, समारोह से भी बनाई दूरी
शशि थरूर ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें इस पुरस्कार के बारे में मंगलवार को पहली बार जानकारी मिली और उन्होंने तभी साफ कर दिया था कि वे समारोह में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी बयान जारी कर कहा कि जानकारी के अभाव में पुरस्कार स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।
आयोजक का दावा और सरकार की प्रतिक्रिया
पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (HRDS) इंडिया के सचिव अजी कृष्णन ने थरूर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सांसद को इस सम्मान की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। उनके अनुसार, संस्था के प्रतिनिधियों और चयन समिति के अध्यक्ष ने थरूर से उनके आवास पर मुलाकात भी की थी। कृष्णन ने दावा किया कि थरूर ने पुरस्कार पाने वालों की सूची भी मांगी थी और अब तक कार्यक्रम में न आने की कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई। उन्होंने संकेत दिया कि संभवतः कांग्रेस के दबाव में थरूर ने अपना फैसला बदला है।
आज दिया जाना था सावरकर अवॉर्ड
वहीं केरल के कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि पुरस्कार स्वीकार करना या न करना थरूर का अपना निर्णय है। उल्लेखनीय है कि एचआरडीएस-इंडिया की ओर से बुधवार को नई दिल्ली में पहला वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2025 दिया जाना था, जिसमें थरूर को भी चयनित किया गया था।