डायबिटीज के मरीजों के लिए खुशखबरी है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी (IIT, Guwahati) के शोधकर्ताओं ने मानव इंसुलिन (Human insulin) के उत्पादन के लिए एक नई पद्धति विकसित की है। आईआईटी गुवाहाटी ने जो नया मेथड डेवलप किया है, उससे इंसुलिन की दवा सस्ती और सुलभ हो सकती है। आईआईटी गुवाहाटी ने ही शुक्रवार को यह जानकारी दी।
IIT गुवाहाटी की खोजी तकनीक के मिले दो पेटेंट
IIT गुवाहाटी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस पद्धति में 'स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस' (Pseudomonas fluorescens) नामक एक सुरक्षित और प्रभावकारी जीवाणु प्रणाली (Bacterial systems) का उपयोग किया जाता है। विकसित की गई तकनीक को दो भारतीय पेटेंट दिए गए हैं और रिसर्च के रिजल्ट इंटरनैशनल जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल मैक्रोमोलेक्यूल्स (IJBM) और जर्नल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
रिसर्च टीम का नेतृत्व जैव विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग (Department of Biosciences and Bioengineering) के प्रोफेसर एवं पूर्व प्रमुख तथा राजीव गांधी ज्ञान प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGUKT), नुजविद (आंध्र प्रदेश) के पूर्व निदेशक वीरंकी वेंकट दासू ने किया।
डायबिटीज सबसे आम बीमारी
बयान में कहा गया है कि हाल के दिनों में मधुमेह (Diabetes) सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन गई है, जिससे दुनिया भर में 53.7 करोड़ से अधिक वयस्क पीड़ित हैं। विशेष रूप से टाइप 1 और कई टाइप 2 मधुमेह रोगियों के लिए रोगियों के लिए इंसुलिन एक जीवन रक्षक हार्मोन है।
इंसुलिन की भार मांग और उत्पादन का महंगा तरीका
बयान में कहा गया है कि दुनिया भर में इंसुलिन की व्यापक मांग के बावजूद इंसुलिन उत्पादन के वर्तमान तरीके महंगे हैं। इसमें कहा गया है, 'स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस का उपयोग करके पुनः संयोजक मानव इंसुलिन उत्पादन (Recombinant human insulin production) के लिए आनुवंशिक (Genetic), उपापचयी (metabolic) और जैव रासायनिक इंजीनियरिंग (Biochemical Engineering) दृष्टिकोणों का उपयोग करके एक जैवप्रक्रिया तकनीक (Bioprocessing Techniques) विकसित की गई है।'