
Census 2027 : भारत में दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना होने जा रही है। पूरी तरह डिजिटल प्रॉसेस से होने वाली जनगणना दो चरणों में पूरी होगी। जनणगना 2027 का पहला चरण बुधवार, 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। यह जनगणना कई पहलुओं से पिछली सभी जनगणनाओं से विशेष है। इस बार भारत के सभी निवासी खुद से ही अपनी गणना करेंगे जिसे स्व-गणना या सेल्फ एन्युमरेशन कहा गया है। इसी प्रक्रिया से चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना की शुरुआत हो जाएगी।
रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण 'हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस' (HLO) का होगा, जो अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चलेगा। इसके बाद दूसरा चरण 'पॉपुलेशन एन्युमरेशन' यानी जनसंख्या की गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा।
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत 'सेल्फ एन्युमरेशन' है। इसका मतलब है कि लोग घर बैठे वेब-पोर्टल के जरिए 16 भाषाओं में अपनी जानकारी खुद भर सकेंगे। भारत के निवासी अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने के लिए 15 दिनों का समय पाएंगे, जो घर-घर सर्वे शुरू होने से ठीक पहले होगा ।
नारायण ने बताया, 'सेल्फ एन्युमरेशन एक अतिरिक्त सुविधा है जो उत्तरदाताओं को अपनी सुविधानुसार जानकारी भरने की फ्लेक्सिबिलिटी देती है।' इसके लिए आपको मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा और जानकारी भरने के बाद मिले सेल्फ एन्युमरेशन आईडी (SE ID) को बाद में आने वाले कर्मचारी (एन्युमरेटर) को दिखाना होगा।
सरकार ने इस महा-अभियान के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। जनगणना में तैनात 31 लाख से ज्यादा कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करेंगे और उसे सीधे सबमिट करेंगे। डेटा की सुरक्षा के लिए पुख्ता नियम बनाए गए हैं ताकि किसी भी नागरिक की निजी जानकारी सुरक्षित रहे।
दूसरे चरण यानी पॉपुलेशन एन्युमरेशन के दौरान पहली बार जाति की गणना भी की जाएगी, जैसा कि सीसीपीए ने तय किया है। इस दौरान लोगों की शिक्षा, पलायन, प्रजनन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। वहीं पहले चरण में घर की स्थिति, वहां मौजूद सुविधाओं और संपत्तियों का डेटा लिया जाएगा।
1 अप्रैल से 15 मई, 2026: अंडमान निकोबार, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम।
1 मई से 30 मई, 2026: मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और चंडीगढ़।
अन्य राज्य: उत्तर प्रदेश (22 मई), बिहार (2 मई), पश्चिम बंगाल (तारीख तय होना बाकी)।
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश (State/UT) | सेल्फ-एन्युमरेशन की अवधि | घर-घर जाकर डेटा जुटाने की अवधि |
|---|---|---|
| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम, और दिल्ली (NDMC और दिल्ली कैंट) | 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 | 16 अप्रैल से 15 मई 2026 |
| गुजरात*, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव | 5 अप्रैल से 19 अप्रैल 2026 | 20 अप्रैल से 19 मई 2026 |
| उत्तराखंड | 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 | 25 अप्रैल से 24 मई 2026 |
| मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा | 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 | 1 मई से 30 मई 2026 |
| बिहार | 17 अप्रैल से 1 मई 2026 | 2 मई से 31 मई 2026 |
| तेलंगाना | 26 अप्रैल से 10 मई 2026 | 11 मई से 9 जून 2026 |
| पंजाब | 30 अप्रैल से 14 मई 2026 | 15 मई से 13 जून 2026 |
| महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान, झारखंड** और दिल्ली (MCD) | 1 मई से 15 मई 2026 | 16 मई से 14 जून 2026 |
| उत्तर प्रदेश | 7 मई से 21 मई 2026 | 22 मई से 20 जून 2026 |
| जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी | 17 मई से 31 मई 2026 | 1 जून से 30 जून 2026 |
| हिमाचल प्रदेश | 1 जून से 15 जून 2026 | 16 जून से 15 जुलाई 2026 |
| केरल और नागालैंड | 16 जून से 30 जून 2026 | 1 जुलाई से 30 जुलाई 2026 |
| तमिलनाडु और त्रिपुरा | 17 जुलाई से 31 जुलाई 2026 | 1 अगस्त से 30 अगस्त 2026 |
| असम | 2 अगस्त से 16 अगस्त 2026 | 17 अगस्त से 15 सितंबर 2026 |
| मणिपुर | 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 | 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 |
| पश्चिम बंगाल | जल्द तय होगा | जल्द तय होगा |
भारत में जनगणना एक संवैधानिक जिम्मेदारी है, जिसे गृह मंत्रालय के तहत महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय संचालित करता है। जनगणना कानून, 1948 और सरकार को जनगणना करने की शक्ति देता है और नागरिकों के लिए सही जानकारी देना अनिवार्य बनाता है। वहीं, जनगणना नियम, 1990 के तहत जनगणना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए समय-समय पर संशोधित नियमों का पालन किया जाता है। ये नियम डेटा कलेक्शन की प्रक्रिया और अधिकारियों की नियुक्तियों को स्पष्ट करते हैं।
जनगणना 2027 भारत की आजादी के बाद की 8वीं और श्रृंखला में कुल 16वीं जनगणना होगी। सरकार ने 16 जून, 2025 को जनगणना 2027 का गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। भारत की पिछली जनगणना 2011 में की गई थी। आमतौर पर जनगणना हर 10 वर्ष में होती है, लेकिन इस बार छह साल की देरी से यह प्रक्रिया हो रही है।
इस देरी का एक मुख्य कारण पूरी व्यवस्था को पेपर से बदलकर 'डिजिटल' करना भी है। पहली बार एन्युमरेटर मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे और जनता को खुद विवरण भरने (सेल्फ एन्युमरेशन) की सुविधा दी गई है। जनगणना की तैयारी के लिए सभी प्रशासनिक इकाइयों को 1 जनवरी, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक के लिए 'फ्रीज' कर दिया गया है। इस बार जाति गणना को भी दूसरे चरण में शामिल किया गया है, जिसके लिए सीसीपीए (CCPA) द्वारा निर्णय लिया गया है।
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