Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: भारत की बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का पहला खंड वर्ष 2027 में यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। यह परियोजना देश के परिवहन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव मानी जा रही है और इसके जरिए भारत हाई-स्पीड रेल नेटवर्क वाले चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा।
रेल मंत्री के अनुसार परियोजना का पहला परिचालन खंड गुजरात में सूरत से बिलीमोरा के बीच शुरू किया जाएगा। इस खंड पर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे सबसे पहले चालू करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य है कि यात्रियों को जल्द से जल्द हाई-स्पीड रेल सेवा का अनुभव मिले, इसलिए परियोजना को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
कितनी लंबी है मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 508 किलोमीटर है।
इस कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं:
- मुंबई
- ठाणे
- विरार
- बोइसर
- वापी
- बिलीमोरा
- सूरत
- भरूच
- वडोदरा
- आनंद
- अहमदाबाद
- साबरमती
परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय करीब 7 घंटे से घटकर लगभग 2 से 3 घंटे रह जाएगा।
जापान की शिंकान्सेन तकनीक का इस्तेमाल
भारत की पहली बुलेट ट्रेन जापान की प्रसिद्ध शिंकान्सेन (Shinkansen) तकनीक पर आधारित होगी। शिंकान्सेन दुनिया की सबसे सुरक्षित और समयबद्ध हाई-स्पीड रेल प्रणालियों में गिनी जाती है। जापान ने इस परियोजना के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई है।
निर्माण कार्य कहां तक पहुंचा?
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गुजरात में परियोजना का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। कई वायाडक्ट तैयार हो चुके हैं। प्रमुख पुलों का निर्माण जारी है। स्टेशनों का विकास तेजी से हो रहा है। ट्रैक और सिग्नलिंग से जुड़े कार्य भी प्रगति पर हैं। गुजरात हिस्से में भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिससे निर्माण गति पकड़ रहा है।
कितनी होगी बुलेट ट्रेन की रफ्तार?
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति लगभग 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यह भारत की सबसे तेज ट्रेन होगी और वर्तमान रेल सेवाओं की तुलना में कई गुना तेज यात्रा उपलब्ध कराएगी।
अर्थव्यवस्था को कैसे होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि बुलेट ट्रेन परियोजना केवल परिवहन सुविधा नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक इंजन साबित हो सकती है।