अमेरिका के दबाव के बीच दिल्ली-मॉस्को की मास्टर प्लानिंग, 5 साल की सुपर स्ट्रैटेजिक डील

भारत और रूस ने आर्थिक व व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए एक पंचवर्षीय रणनीतिक योजना पर सहमति जताई है। शिखर वार्ता में दोनों देशों ने स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यूक्रेन युद्ध पर भारत ने संवाद के जरिए समाधान का अपना रुख दोहराया।

Rishabh Shukla
अपडेटेड5 Dec 2025, 05:58 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

भारत और रूस ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक नई पंचवर्षीय आर्थिक योजना पर सहमति जताई है। दिल्ली में हुई शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी साझेदारी बाहरी परिस्थितियों से नहीं डिगती।

आर्थिक साझेदारी को नई दिशा

शिखर वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए; जिनमें स्वास्थ्य, गतिशीलता, ऊर्जा और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाले समझौते प्रमुख हैं। पीएम मोदी ने कहा कि गत आठ दशकों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। मानवता को अनेक चुनौतियों और संकटों से गुजरना पड़ा है। इसके बावजूद भारत-रूस की दोस्ती ध्रुव तारे की तरह अडिग रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए तैयार खाके का जिक्र करते हुए कहा कि भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को नयी ऊंचाइयों पर ले जाना अब दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता है।

यूक्रेन युद्ध पर भारत का स्पष्ट रुख

वार्ता के दौरान यूक्रेन युद्ध सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम इस मामले के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं। भारत हमेशा अपना योगदान देने के लिए तैयार रहा है और भविष्य में भी ऐसा ही करता रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खतरे पर कहा कि भारत और रूस लंबे समय से इस खतरे के खिलाफ लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। उन्होंने कहा, चाहे पहलगाम में आतंकवादी हमला हो या क्रोकस सिटी हॉल पर कायरतापूर्ण हमला इन सभी घटनाओं की जड़ एक ही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत का यह दृढ़ विश्वास है कि आतंकवाद मानवता के मूल्यों पर सीधा हमला है और इसके खिलाफ वैश्विक एकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

व्यापार, ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में बढ़ता सहयोग

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत-रूस सहयोग अगले वर्षों में और व्यापक होगा, विशेषकर ऊर्जा, सुरक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में। दोनों देशों ने वार्षिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर सहमति जताई। रूस ने भारत को ईंधन की निर्बाध आपूर्ति जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई और साथ ही छोटे मॉड्यूलर और फ्लोटिंग न्यूक्लियर प्लांट पर सहयोग की संभावनाओं का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि दुर्लभ खनिजों पर भारत-रूस सहयोग दुनिया के लिए सुरक्षित और विविध सप्लाई चेन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैश्विक राजनीति में नई धुरी

वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और रूस मिलकर एक न्यायसंगत, संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करेंगे। यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ जल्द मुक्त व्यापार समझौता करने पर भी बातचीत आगे बढ़ी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह डील भारत की थर्ड-वे भू-राजनीतिक रणनीति को और मजबूत करेगी, जिसमें वह पश्चिमी देशों और रूस-चीन दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाकर चलता है। दोनों देशों की 80 साल पुरानी दोस्ती अब नए वैश्विक दौर में एक निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार दिखती है।

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