Renewable Energy 2025: भारत ने साल 2025 में क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक ऐसी कामयाबी हासिल की है जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है। देश की कुल बिजली क्षमता में अब आधे से ज्यादा हिस्सा रीन्यूएबल एनर्जी का है। सोलर पावर से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों तक, हर सेक्टर में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार और बड़ी कंपनियों के निवेश ने इस बदलाव को और रफ्तार दी है। यह तरक्की न केवल प्रदूषण कम करने में मददगार है बल्कि भारत को ग्लोबल लीडर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
जीवाश्म ईंधन से आगे निकली रीन्यूएबल एनर्जी
भारत की कुल बिजली पैदा करने की क्षमता अब 510 गीगावाट पर पहुंच गई है। इसमें सबसे राहत की बात यह है कि 262 गीगावाट क्षमता अब गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil fuel) से आ रही है। कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन की क्षमता 247 गीगावाट है। इसका मतलब है कि देश की कुल ऊर्जा जरूरतों में क्लीन एनर्जी की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा हो गई है। इसमें रीन्यूएबल एनर्जी का अकेले योगदान 254 गीगावाट के करीब है।
सोलर और विंड एनर्जी ने पकड़ी रफ्तार
इस साल भारत ने अपनी रीन्यूएबल एनर्जी क्षमता में करीब 50 गीगावाट का इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी में सौर ऊर्जा का बड़ा हाथ रहा है, जिसने अकेले 35 गीगावाट की क्षमता जोड़ी है। सोलर के साथ-साथ विंड एनर्जी में भी देश ने शानदार प्रदर्शन किया है। मार्च, 2025 तक भारत ने विंड एनर्जी के क्षेत्र में 50 गीगावाट से अधिक का बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है।
ईवी मार्केट में टाटा मोटर्स का दबदबा
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बाजार में भी बड़ी क्रांति देखी जा रही है और कुल बिक्री 20 लाख यूनिट्स के पार हो गई है। टाटा मोटर्स इस रेस में सबसे आगे है जिसकी 2.5 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें सड़कों पर दौड़ रही हैं। देश में बिकने वाली हर तीन में से करीब दो इलेक्ट्रिक कारें टाटा की हैं। कंपनी की नेक्सॉन ईवी एक लाख यूनिट्स की बिक्री पार करने वाली पहली इलेक्ट्रिक कार बन गई है। टाटा मोटर्स अब 2030 तक अपनी 50% हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए 18,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी।
ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज पर जोर
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन शुरू हो गया है। NTPC ग्रेटर नोएडा में हर दिन 1 टन क्षमता वाला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगाने की तैयारी में है। इसके अलावा, बिजली को स्टोर करने के लिए बैटरी स्टोरेज (BESS) पर भी भारी निवेश हो रहा है। उम्मीद है कि 2030 तक इस सेक्टर में 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। सरकार भी बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिए 5,400 करोड़ रुपये की फंडिंग स्कीम चला रही है।