Indian Railways: अगर आप भी ट्रेन में RAC टिकट पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) ने भारतीय रेलवे को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी मानते हुए एक यात्री को ₹25,000 का भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह फैसला उस मामले में आया, जिसमें RAC टिकट पर यात्रा कर रहे दो अनजान यात्रियों को पूरी रात ओढ़ने के लिए सिर्फ एक कंबल दिया गया था। आयोग ने माना कि यह न केवल यात्रियों की सुविधा के साथ समझौता है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न का भी मामला है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अक्टूबर 2022 का है। प्रयागराज से नई दिल्ली जा रहे एक यात्री ने AC कोच में RAC टिकट पर यात्रा की थी। RAC होने के कारण उसे अपनी सीट दूसरे यात्री के साथ साझा करनी पड़ी। लेकिन यात्रा के दौरान दोनों यात्रियों को केवल एक कंबल, एक तकिया और दो बेडशीट उपलब्ध कराई गईं। शिकायतकर्ता ने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ एक ही कंबल साझा करना बेहद असहज था और इससे उसे पूरी रात परेशानी का सामना करना पड़ा।
अतिरिक्त कंबल मांगा तो रेलवे ने क्या कहा?
यात्री ने ट्रेन अटेंडेंट से अलग कंबल और तकिया देने की मांग की। लेकिन उसे बताया गया कि "एक सीट पर एक कंबल, एक तकिया और दो बेडशीट देने का ही नियम है।" इसके बाद यात्री ने सोशल मीडिया के जरिए रेलवे से शिकायत की और अपना PNR भी साझा किया। हालांकि अतिरिक्त कंबल देने के बजाय उसे केवल एक तौलिया उपलब्ध कराया गया। उसने टीटीई से शिकायत पुस्तिका भी मांगी, लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
RTI का भी नहीं मिला जवाब
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद यात्री ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। करीब छह महीने बाद उसे सूचना मिली कि मामला प्रयागराज के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को भेज दिया गया है। इसके बाद उसने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार उसने दिल्ली उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
रेलवे ने आयोग में क्या दलील दी?
उत्तरी रेलवे ने आयोग को बताया कि बेडरोल रेलवे के तय नियमों के अनुसार दिए जाते हैं और अतिरिक्त कंबल उपलब्धता पर निर्भर करता है। रेलवे ने यह भी कहा कि लिनेन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ठेका कंपनी की थी और मामले की जांच संबंधित रेलवे जोन कर रहा था।
आयोग ने रेलवे की दलील क्यों खारिज की?
सुनवाई के दौरान आयोग ने रेलवे बोर्ड के 23 सितंबर 2009 के सर्कुलर का हवाला दिया। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि AC कोच में RAC यात्रियों से भी बेडरोल शुल्क लिया जाता है, इसलिए उन्हें पूरी बेडरोल सुविधा मिलनी चाहिए। आयोग ने यह भी पाया कि रेलवे ने लिनेन उपलब्ध कराने वाली ठेका कंपनी पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया था। इससे साफ हो गया कि सेवा में कमी हुई थी। हालांकि रेलवे यह साबित नहीं कर सका कि शिकायतकर्ता को बाद में अलग बेडरोल उपलब्ध कराया गया था।
रेलवे को कितना भुगतान करना होगा?
आयोग ने भारतीय रेलवे को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को—
- ₹20,000 मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक असुविधा के लिए,
- ₹5,000 मुकदमे के खर्च के रूप में दिए जाएं।
यानी कुल ₹25,000 का भुगतान 60 दिनों के भीतर करना होगा। यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो आदेश की तारीख से 7% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
यात्रियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो RAC टिकट पर सफर करते हैं। आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि रेलवे यात्रियों से बेडरोल शुल्क लेता है तो उन्हें पूरी सुविधा देना उसकी जिम्मेदारी है। सेवा में कमी होने पर यात्री उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटा सकते हैं और मुआवजा पाने के हकदार हो सकते हैं।