आज के समय में जब लाखों लोग रोजाना ट्रेन से सफर करते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है, क्या हमारी रेल यात्रा पहले से ज्यादा सुरक्षित हो गई है? इसी सवाल का जवाब सरकार ने अपने नए डेटा में दिया है। पिछले 11 सालों में रेलवे की सुरक्षा और संरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जो काम हुए हैं, उनका असर अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है। बजट बढ़ा है, तकनीक बेहतर हुई है और हादसों के आंकड़े भी पहले से कई गुना कम हो गए हैं।
रेलवे सुरक्षा का बजट तीन गुना से ज्यादा बढ़ा
सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 में जहां रेलवे सुरक्षा का वार्षिक बजट 39,463 करोड़ रुपये था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 1,16,470 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि रेलवे ने सुरक्षा को लेकर पिछले एक दशक में कितनी गंभीरता से काम किया है।
रेल हादसों में बड़ी गिरावट
भारतीय रेल की शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के हवाले से कहा गया है कि बढ़ते सुरक्षा निवेश का असर सीधा दुर्घटनाओं के कम होते आंकड़ों में देखने को मिलता है। 2014 में औसतन 171 रेल हादसे होते थे, 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 11 रह गई। यह रेलवे के इतिहास में सबसे बेहतर सुरक्षा रिकॉर्ड्स में से एक माना जा रहा है।
कोहरा सुरक्षा उपकरणों में बड़ा इजाफा
2014 में रेलवे में सिर्फ 90 कोहरा सुरक्षा उपकरण लगे हुए थे, लेकिन 2025 आते-आते यह संख्या 25,939 तक पहुंच गई। यानी 288 गुना वृद्धि। कोहरे में चलने वाली ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने में इसका बड़ा योगदान माना जा रहा है।
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि पिछले चार महीनों में 21 स्टेशनों पर सेंट्रलाइज्ड इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और ट्रैक-सर्किटिंग का काम पूरा हो चुका है, जिससे ट्रेन मूवमेंट और सुरक्षित हो गया है।
ट्रैक में छेड़छाड़ की घटनाओं पर सख्त कदम
2023 और 2024 में रिपोर्ट हुई रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़ की घटनाओं पर राज्य पुलिस, जीआरपी और अन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई की। मामलों में FIR दर्ज की गई, जांच की गई, अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और कानूनी कार्रवाई की गई।
रेलवे ने बताया कि RPF राज्य पुलिस और GRP के साथ मिलकर ट्रैक की सुरक्षा पर लगातार नजर रखती है। खुफिया जानकारी साझा की जाती है और जरूरत पड़ने पर NIA और CBI जैसी एजेंसियों की मदद भी ली जाती है।