Indian Railways expansion: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती संख्या और ट्रेनों की मांग को देखते हुए मेगा प्लानिंग की है। इसके तहत अगले पांच सालों में देश के 48 सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों की क्षमता को दोगुना किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने सभी जोन के जनरल मैनेजरों को इस मिशन पर काम शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। इस कदम से न केवल ट्रेनों की आवाजाही सुधरेगी, बल्कि यात्रियों को भी वेटिंग और भीड़ से राहत मिलेगी।
स्टेशनों पर बढ़ेगा प्लेटफॉर्म और लाइनों का जाल
रेलवे की इस योजना का सबसे मुख्य हिस्सा मौजूदा स्टेशनों का विस्तार करना है। इसमें पुराने टर्मिनलों पर नए प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन खड़ी करने की जगह (स्टेब्लिंग लाइनें) और कोच की सफाई वाली जगह (पिट लाइनें) भी बढ़ाई जाएंगी। शंटिंग की सुविधाओं को भी बेहतर किया जाएगा ताकि ट्रेनों को प्लेटफॉर्म पर लाने और ले जाने में समय न बर्बाद हो।
बड़े शहरों में बनेंगे नए टर्मिनल और कॉम्प्लेक्स
सिर्फ पुराने स्टेशनों पर निर्भर रहने के बजाय रेलवे अब शहरी इलाकों के आसपास नए टर्मिनल भी बनाएगा। इससे मुख्य स्टेशनों पर दबाव कम होगा। योजना में मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स बनाने का भी जिक्र है। इन कॉम्प्लेक्स में ट्रेनों के रखरखाव की आधुनिक सुविधाएं होंगी। साथ ही, सिग्नलिंग सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा और पटरियों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
इन 48 शहरों की बदलेगी सूरत
रेलवे ने इस प्लान के लिए देश के प्रमुख केंद्रों को चुना है। इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगर शामिल हैं। इनके अलावा पटना, लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, भोपाल, वाराणसी, आगरा और गुवाहाटी जैसे शहरों के स्टेशनों का भी कायाकल्प होगा। अमृतसर, लुधियाना, सूरत, वडोदरा और विशाखापत्तनम जैसे कमर्शियल हब भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
पुणे मॉडल पर संतुलित विकास
रेलवे बोर्ड चाहता है कि क्षमता बढ़ाने का काम इस तरह हो कि बोझ एक ही स्टेशन पर न पड़े। इसके लिए 'बैलेंस्ड कैपेसिटी' का फॉर्मूला अपनाया गया है। उदाहरण के लिए, पुणे में सिर्फ पुणे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नहीं बढ़ेंगे। इसके साथ ही हडपसर, खडकी और आलंदी जैसे पास के स्टेशनों को भी विकसित किया जाएगा ताकि ट्रैफिक बराबर बंट सके।
2030 तक का लक्ष्य और तीन फेज में काम
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने साफ किया है कि यह प्लान स्पष्ट और समय सीमा के भीतर होना चाहिए। हालांकि अंतिम लक्ष्य 2030 तक का है, लेकिन अगले 5 सालों में इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। कामों को तीन श्रेणियों- तत्काल, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में बांटा गया है। इससे यात्रियों को सुधार का फायदा जल्द मिलना शुरू हो जाएगा।