Indigo fined: दिसंबर में हवाई यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। अचानक कैंसिल हुई फ्लाइट्स, घंटों की देरी और एयरपोर्ट्स पर बढ़ती भीड़ ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। अब इसी पूरे मामले में विमानन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने सख्त रुख अपनाते हुए देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर भारी जुर्माना लगाया है।
₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना
DGCA ने शनिवार को जारी बयान में बताया कि दिसंबर महीने में बड़े पैमाने पर हुई उड़ान बाधाओं को गंभीरता से लेते हुए इंडिगो पर कुल ₹22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। नियामक के मुताबिक, 5 दिसंबर से 10 फरवरी तक फ्लाइट ड्यूटी नियमों में दी गई छूट के बदले कंपनी पर 68 दिनों तक रोजाना ₹30 लाख का जुर्माना लगाया गया, जो ₹20.40 करोड़ बैठता है। इसके अलावा, सिस्टम से जुड़ी गंभीर खामियों को देखते हुए ₹1.80 करोड़ की एकमुश्त पेनाल्टी भी लगाई गई।
तीन दिनों की घटनाएं बनी कार्रवाई की आधार
DGCA की कार्रवाई का आधार 3 से 5 दिसंबर के बीच का वह दौर रहा, जब इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं और 1,852 फ्लाइट्स में देरी हुई थी। हालांकि इसके बाद भी व्यवधान जारी रहा, लेकिन जांच समिति ने इन्हीं तीन दिनों को सबसे गंभीर मानते हुए रिपोर्ट तैयार की, जिसे 26 दिसंबर को DGCA को सौंपा गया।
वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गिरी गाज
नियामक ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को औपचारिक रूप से आगाह किया है। वहीं, मुख्य परिचालन अधिकारी इसिडर पोरक्रस को विंटर शेड्यूल और फ्लाइट ड्यूटी से जुड़े नए नियमों के असर का सही आकलन न करने पर चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष (ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर) जैसन हर्टर को मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त करने और कोई नया दायित्व न देने का निर्देश दिया गया है। उड़ान परिचालन से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी चेतावनी जारी की गई है।
₹50 करोड़ की बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी
DGCA ने इंडिगो को ₹50 करोड़ की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश भी दिया है। हालांकि यह रकम स्थायी रूप से जब्त नहीं होगी। जैसे-जैसे एयरलाइन नियामक द्वारा तय किए गए सुधारात्मक लक्ष्यों को पूरा करती जाएगी, उसी अनुपात में यह राशि उसे वापस मिलती जाएगी।
नियमों के उल्लंघन और सिस्टम पर सवाल
नियामक ने सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) के छह प्रावधानों के उल्लंघन को गंभीर माना है, जिनके लिए 30-30 लाख रुपये के अलग-अलग जुर्माने लगाए गए हैं। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इंडिगो प्रबंधन ने चालक दल, विमानों और नेटवर्क संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल पर जरूरत से ज्यादा जोर दिया, जिससे किसी भी देरी या आपात स्थिति से निपटने की गुंजाइश ही नहीं बची।
तैयारी की कमी बनी इंडिगो के लिए संकट
जांच में यह भी सामने आया कि नए नियमों में बदलाव के अनुरूप एयरलाइन समय रहते खुद को तैयार नहीं कर पाई। इसके अलावा सिस्टम सॉफ्टवेयर सपोर्ट, प्रबंधन ढांचे और ऑपरेशनल कंट्रोल में मौजूद खामियों ने हालात को और बिगाड़ दिया, जिससे दिसंबर की उड़ान अफरातफरी सामने आई।