IndusInd Bank news: इंडसइंड बैंक की बड़ी कार्रवाई! पूर्व सीईओ और वाइस प्रेसीडेंट से वापस लिया जाएगा वेतन और बोनस

IndusInd Bank news: इंडसइंड बैंक ने पूर्व सीईओ सुमंत कथपालिया और उप मुख्य अधिकारी अरुण खुराना से कदाचार और गलत रिपोर्टिंग के आरोपों के बाद वेतन और बोनस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है। दोनों पर SEBI और प्रवर्तन एजेंसियां जांच कर रही हैं।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड12 Nov 2025, 07:54 PM IST
इंडसइंड बैंक में बड़ा एक्शन, पूर्व सीईओ और अफसर से वापस लिया जाएगा वेतन और बोनस
इंडसइंड बैंक में बड़ा एक्शन, पूर्व सीईओ और अफसर से वापस लिया जाएगा वेतन और बोनस

IndusInd Bank news: इंडसइंड बैंक ने अपने पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और उप मुख्य अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बैंक अब दोनों से उनका वेतन और बोनस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। यह कदम उस समय उठाया गया जब बैंक की आंतरिक जांच में गंभीर कदाचार और गलत रिपोर्टिंग का मामला सामने आया।

बैंक को हुआ बड़ा नुकसान

इस साल की शुरुआत में बैंक ने खुलासा किया था कि डेरिवेटिव ट्रेड्स से जुड़े गलत अकाउंटिंग की वजह से उसे करीब 230 मिलियन डॉलर (लगभग 2000 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ। इस गड़बड़ी के बाद पूर्व सीईओ सुमंत कथपालिया और उप मुख्य अधिकारी (वाइस प्रेसीडेंट) अरुण खुराना दोनों ने मई 2025 में अपना पद छोड़ दिया था।

अब दोनों अधिकारियों पर इनसाइडर ट्रेडिंग और लेखांकन अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है, जिसमें भारतीय बाजार नियामक SEBI और प्रवर्तन एजेंसियां शामिल हैं।

2019 से ही बने नियम

यह जानना दिलचस्प है कि भारतीय बैंकिंग नियमों में 2019 से कर्मचारी अनुबंधों में वेतन और बोनस वापस लेने (clawback) की अनुमति दी गई है। हालांकि, इतने सालों में ऐसे कदम बेहद दुर्लभ रहे हैं, अब तक सिर्फ दो ही मामले सामने आए हैं। इंडसइंड बैंक का यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह उन कुछ बैंकों में से है जो इस नियम को सख्ती से लागू कर रहे हैं।

बैंक बोर्ड का सख्त रुख और कानूनी तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, बैंक के बोर्ड ने आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार कानूनी राय ली है और अपने कोड ऑफ कंडक्ट के तहत जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। बैंक बोर्ड ने इस केस को “लेखांकन में गलत बयान, आंतरिक नियंत्रण की विफलता और नियमों का उल्लंघन” की श्रेणी में रखा है। बैंक की आचार संहिता के अनुसार, ऐसे कृत्य “कदाचार” माने जाते हैं, जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी होती है।

कितनी रकम और कब की सैलरी पर चलेगी कैंची

खबर है कि बैंक की रिकवरी प्रक्रिया दिसंबर 2023 से मार्च 2025 के बीच की अवधि को कवर करेगी। हालांकि, यह साफ नहीं हुआ है कि कुल कितनी राशि वापस ली जाएगी या और कितने अफसरों पर कार्रवाई होगी। कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, कथपालिया का फिक्स्ड पे 7.5 करोड़ रुपये, जबकि खुराना का फिक्स्ड पे 5 करोड़ रुपये था।

SEBI और एजेंसियों की जांच तेज

SEBI ने मई में दोनों अफसरों को सिक्योरिटीज मार्केट से बैन कर दिया था, जब तक जांच पूरी नहीं होती। वहीं बैंक का नया प्रबंधन अब अपनी आंतरिक जवाबदेही और सिस्टम सुधारने के लिए एक बड़ा संगठनात्मक ओवरहॉल करने की तैयारी में है, जो नए वित्तीय वर्ष से पहले पूरा किया जाएगा।

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