तो अन्य राज्यों में भी अराजकता फैलेगी… ED केस में SC ने ममता की दखल को बताया बहुत गंभीर मामला

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के रवैये को बेहद गंभीरता से लिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कहा कि वो ईडी जांच में दखल के मामले को यूं ही नहीं छोड़ सकता क्योंकि ऐसा करने से अन्य राज्यों में भी अराजकता फैल सकती है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड16 Jan 2026, 08:40 AM IST
सुप्रीम कोर्ट में घिरीं ममता बनर्जी।
सुप्रीम कोर्ट में घिरीं ममता बनर्जी।

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाले के सिलसिले में 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' (आई-पैक) के कोलकाता स्थित दफ्तर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दखलअंदाजी पर बेहद कड़ी टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में ईडी के आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इस मुद्दे को सुलझाना बहुत जरूरी है वरना देशभर में अराजकता की ऐसी ही स्थिति पैदा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार को एक और तगड़ा झटका देते हुए ईडी पर की गई एफआईआर पर भी रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान संस्थागत स्वतंत्रता और कानून के शासन की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सिब्बल और सिंघवी की दलीलें खारिज, सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

आईपैक ऑफिस में छापेमारी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लंबी सुनवाई हुई जिसमें ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने रखा। वहीं, प. बंगाल के डीजीपी और कोलकाता पुलिस प्रमुख का प्रतिनिधित्व अभिषेक मनु सिंघवी ने किया। इन दोनों वकीलों के तर्कों को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की जांच में बाधा डाली जो बेहद गंभीर मामला है। न्यायालय ने इस बात की समीक्षा करने पर भी सहमति जताई कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​किसी गंभीर अपराध के मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।

कानून के राज का पालन करने और हर अंग को स्वतंत्र रूप से काम करने देने के लिए इन मामलों की जांच जरूरी है, ताकि अपराधी किसी खास राज्य की कानून लागू करने वाली एजेंसियों के तहत सुरक्षित न रहें।- सुप्रीम कोर्ट

ईडी ऑफिसरों के खिलाफ एफआईआर पर रोक

इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा भी दी है जिन्होंने कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में 8 जनवरी को आई-पैक ऑफिस और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था। शीर्ष अदालत ने दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए प. बंगाल की पुलिस को छापेमारी की कार्रवाई के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

जांच में बाधा एक गंभीर मुद्दा: सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने मुख्यमंत्री बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, डीजीपी राजीव कुमार और शीर्ष पुलिस अधिकारियों को ईडी की उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है, जिनमें आई-पैक परिसर में छापेमारी में बाधा डालने के आरोप में उनके खिलाफसीबीआई की जांच का अनुरोध किया गया है। पीठ ने कहा, 'हमारी प्रथम दृष्टया राय है कि इस याचिका में ईडी या अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच और उसमें राज्य एजेंसियों के हस्तक्षेप से संबंधित एक गंभीर मुद्दा उठाया गया है।'

यह गंभीर मुद्दा, छोड़ दिया तो अराजकता फैलेगी: सुप्रीम कोर्ट

न्यायालय ने कहा, 'हमें लगता है कि देश में कानून के शासन का पालन सुनिश्चित करने और प्रत्येक अंग को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति देने के लिए इस मुद्दे की समीक्षा आवश्यक है ताकि अपराधियों को किसी विशेष राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की छत्रछाया में संरक्षण न मिल सके।' सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा, 'इसमें बड़े सवाल शामिल हैं और उठाए गए हैं, जिन्हें अगर अनसुलझा छोड़ दिया जाए तो स्थिति और बिगड़ जाएगी तथा अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग संगठनों के शासन को देखते हुए किसी न किसी राज्य में अराजकता की स्थिति बनी रहेगी।'

आड़ लेकर एजेंसियों के काम में बाधा नहीं डाला जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी राजनीतिक दल के चुनावी काम में हस्तक्षेप करने की शक्ति किसी केंद्रीय एजेंसी के पास नहीं है लेकिन साथ ही यदि केंद्रीय एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की जांच के लिए सद्भावना से काम कर रही हैं, तो सवाल उठता है कि क्या दलगत गतिविधि की आड़ में एजेंसियों को अपने कर्तव्य निभाने से रोका जा सकता है।

कलकत्ता हाई कोर्ट में अराजकता की स्थिति पर भी जताई चिंता

मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 फरवरी की तारीख तय की गई है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा कि ईडी की छापेमारी संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता उच्च न्यायालय में हुए हंगामे से वह अत्यंत व्यथित है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी आई-पैक से जुड़े स्थानों पर ईडी की छापेमारी और जब्ती कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई अदालत कक्ष के भीतर 'अनियंत्रित भीड़' का हवाला देते हुए 14 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी थी।

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