Iran allows Indian ships: विदेश मंत्री ने ऐसा क्या कहा कि ईरान ने दे दी भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति?

Iran allows Indian ships: अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। हालांकि हर जहाज को पहले ईरान से अनुमति लेनी होगी।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड12 Mar 2026, 02:59 PM IST
इराक के क्षेत्रीय समुद्री जल में मौजूद विदेशी तेल टैंकर। (सांकेतिक तस्वीर)
इराक के क्षेत्रीय समुद्री जल में मौजूद विदेशी तेल टैंकर। (सांकेतिक तस्वीर)(Reuters)

Iran allows Indian ships through Strait of Hormuz: मिडल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच पूरी दुनिया की नजरें एक छोटे से समुद्री रास्ते पर टिकी हैं, जिसे 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) कहते हैं। यह रास्ता पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बाद हालात काफी संवेदनशील हो गए हैं और यहां से जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ गई है। इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है।

भारत के लिए आई राहत की खबर

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को इस अहम समुद्री रास्ते से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। हालांकि इसके साथ एक सख्त चेतावनी भी दी गई है, अगर जहाज बिना अनुमति के गुजरने की कोशिश करेंगे तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

यह समुद्री रास्ता पर्शियन गल्फ को गल्फ ऑफ ओमान से जोड़ता है और दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। ऐसे में भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए यहां की स्थिति बेहद अहम मानी जाती है।

जयशंकर की 'फोन डिप्लोमेसी' रंग लाई

इस मुद्दे को लेकर भारत ने कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रियता दिखाई। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार देर रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर चर्चा हुई। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों की सुरक्षा का मुद्दा बातचीत का अहम हिस्सा रहा। गौर करने वाली बात यह है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत थी।

इस चर्चा का मुख्य एजेंडा यही था कि भारतीय तेल टैंकरों और जहाजों को कोई नुकसान न पहुंचे। नतीजा यह रहा कि गुरुवार को ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को 'सेफ पैसेज' देने का फैसला किया।

ईरान की सख्त चेतावनी

हालांकि भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति मिल गई है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि हर जहाज को पहले उसकी अनुमति लेनी होगी। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने कहा कि जो जहाज चेतावनी को नजरअंदाज करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि बुधवार को दो जहाज 'एक्सप्रेस रोम' और 'मयूरी नारी' ने चेतावनी के बावजूद स्ट्रेट पार करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें निशाना बनाया गया।

तंगसीरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने से पहले ईरान से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।तेहरान का कहना है कि वे केवल उन जहाजों को रोक रहे हैं जो अमेरिका, यूरोप या इजरायल के हितों को बढ़ावा देते हैं।

क्यों इतना महत्वपूर्ण है 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'

दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है। हर दिन यहां से 2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल निकलता है। यही वजह है कि इस रास्ते में थोड़ी भी बाधा आने पर तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक सप्लाई चेन तक पर तुरंत असर पड़ सकता है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाए, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और बिजली का संकट खड़ा हो जाएगा। भारत के लिए यह इसलिए भी खास है क्योंकि हमारा अधिकांश कच्चा तेल इसी रूट से आता है।

भारत के 28 जहाज इलाके में

भारत के शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक इस समय 28 भारतीय झंडे वाले जहाज पर्शियन गल्फ क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं, जिन पर कुल 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं 4 जहाज स्ट्रेट के पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद हैं। सरकार ने बताया कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग में 24 घंटे का कंट्रोल रूम बनाया गया है, जो क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा की निगरानी कर रहा है।

अमेरिका ने खोला खजाना

मिडल ईस्ट के इस संकट और सप्लाई रुकने के डर से ग्लोबल मार्केट में खलबली मची है। इसे शांत करने के लिए अमेरिका ने अपने सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से 17.2 करोड़ बैरल तेल निकालने का फैसला किया है। यह अगले हफ्ते से शुरू होगा ताकि दुनिया भर में तेल की कमी न हो और कीमतें काबू में रहें।

ईरान द्वारा भारतीय जहाजों को रास्ता देना भारत की मजबूत विदेश नीति का प्रमाण है। जहां दुनिया के बड़े-बड़े देश इस रास्ते पर जाने से कतरा रहे हैं, वहीं भारत ने बातचीत के जरिए अपने आर्थिक हितों और अपने नागरिकों की जान सुरक्षित कर ली है। हालांकि, युद्ध की अनिश्चितता अभी बनी हुई है, इसलिए सरकार पूरी सावधानी बरत रही है।

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