Iran-Israel war: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी तनाव ने दुनिया को एक बड़े तेल संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है, लेकिन इसी बीच ईरान ने जापान के लिए अपनी दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। चलिए समझते हैं कि समुद्र के इस सबसे महत्वपूर्ण रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या खेल चल रहा है और कौन-कौन से देश इस परेशानी से पार पा रहे हैं।
जापान को मिल सकता है 'ग्रीन सिग्नल'
क्योडो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फोन इंटरव्यू में कहा कि तेहरान और टोक्यो के बीच बातचीत चल रही है कि जापान से जुड़े जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने दिया जाए। हालांकि, अभी तक न तो जापान और न ही ईरान ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है, लेकिन अगर ऐसा होता है, तो यह जापान की एनर्जी सप्लाई के लिए बहुत बड़ी जीत होगी।
दुनिया के लिए क्यों इतना अहम है हॉर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए कितना जरूरी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि वैश्विक कच्चे तेल का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां रुकावट का मतलब है कि असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एशिया, यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचेगा।
मार्च की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद से यहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 15 मार्च के बीच यहां से मात्र 90 जहाज गुजरे हैं, जबकि आम दिनों में यह संख्या कहीं ज्यादा होती है। ईरान का कहना है कि यह रास्ता अमेरिका और उसके करीबियों को छोड़कर सबके लिए खुला है, लेकिन हमले के डर से ज्यादातर देशों ने यहां से दूरी बना ली है।
किन देशों के जहाजों को अब तक राहत मिली?
- भारत: इस पूरे संकट के बीच भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिसे ईरान ने रास्ता दिया है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पजेश्कियान के बीच हुई बातचीत के बाद मामला सुलझता दिख रहा है। भारत के दो एलपीजी टैंकर पहले ही निकल चुके हैं, और अब 'पाइन गैस' और 'जग वसंत' जैसे दो और टैंकर यूएई के पास से रवाना होने की तैयारी में हैं। कुल मिलाकर फंसे हुए 24 जहाजों को निकालने के लिए बातचीत जारी है।
- पाकिस्तान: पाकिस्तान भी उन चुनिंदा देशों में शामिल बताया जा रहा है, जिनके जहाजों को गुजरने दिया गया। ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान का कराची नाम का टैंकर 15 मार्च को इस रास्ते से सफलतापूर्वक निकला।
- चीन: चीन के मामले में भी तस्वीर काफी दिलचस्प है। CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से जुड़े जहाजों को अपेक्षाकृत नरमी मिली है और बड़ी संख्या में चीन से जुड़े पोत इस मार्ग से गुजरते दिखे। 1 से 15 मार्च के बीच गुजरने वाले जहाजों में भारत, पाकिस्तान और चीन से जुड़े जहाज प्रमुख थे।
- तुर्की: तुर्की के मामले में, ईरान ने 15 में से एक जहाज को गुजरने की अनुमति दी है।
- फ्रांस और इटली: फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस और इटली ने ईरान से बातचीत की इच्छा जताई है, ताकि उनके जहाजों के लिए रास्ता खुल सके।
- जापान: जापान अभी उस सूची में शामिल नहीं हुआ है जिसके जहाज गुजर चुके हों, लेकिन संकेत यही है कि वह अगला देश हो सकता है जिसे राहत मिले।
अमेरिका ने किया दावा, समुद्र में फंसा ईरानी तेल बेचा जाएगा
इस बीच अमेरिका ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों को देखते हुए समुद्र में फंसे कुछ ईरानी तेल की बिक्री के लिए अस्थायी अनुमति दी है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी ने एक सीमित और अल्पकालिक अनुमति जारी की है, जिससे समुद्र में अटके ईरानी तेल की बिक्री और डिलीवरी हो सके। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी इस फैसले की जानकारी दी। इसका मकसद बाज़ार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों के दबाव को कुछ कम करना बताया गया।
लेकिन ईरान की तरफ से इस पर अलग तस्वीर पेश की गई। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के बयान में कहा गया कि फिलहाल ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए ऐसा कोई अतिरिक्त फ्लोटिंग क्रूड उपलब्ध नहीं है। ईरान ने अमेरिकी दावे को बाजार के सेंटिमेंट को संभालने की कोशिश बताया।