Muslim Politics: मुस्लिम राजनीति चमकाने चली थीं महबूबा मुफ्ती, हाई कोर्ट ने पानी-पानी कर दिया

मुस्लिम राजनीति के लिए अदालत को जरिया बनान की कोशिश महबूबा मुफ्ती पर भारी पड़ गई। पीडीपी चीफ को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने खूब खिंचाई की। 

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड24 Dec 2025, 02:51 PM IST
पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो)
पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो)

मुसलमानों की खैरख्वाह बनने चली थीं और लताड़ खाकर लौटीं। ये हाल हुआ है जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का। उन्हें हाई कोर्ट ने ऐसी लताड़ लगाई कि भूल पाना मुश्किल होगा। हाई कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि महबूबा ने राजनीति चमकाने के लिए अदालत का इस्तेमाल करने की कोशिश की।

15 पन्नों के आदेश में खूब सुनाई खरी-खोटी

दरअसल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें बाहर की जेलों से कैदियों को जम्मू-कश्मीर की जेलों में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने मंगलवार को पारित 15 पृष्ठ के आदेश में कहा कि याचिका राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए दायर की गई प्रतीत होती है।

हिंसक अतीत को दरकिनार कर रही हैं महबूबा?

हाई कोर्ट बेंच ने आगे ऐसी बात कही जो महबूबा की नींद उड़ाने को काफी है। बेंच ने कहा, 'ऐसा जान पड़ता है कि याचिकाकर्ता ने यह याचिका स्पष्ट रूप से राजनीतिक लाभ प्राप्त करने और खुद को एक विशेष जनसांख्यिकी के लिए न्याय की योद्धा के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से दाखिल की है।' अदालत ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के निवासियों ने अतीत में हिंसा झेली है। हाई कोर्ट ने कहा कि पीडीपी चीफ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकतीं जैसे उन्हें उस हिंसक अतीत के बारे में उन्हें कुछ पता ही नहीं।

हाई कोर्ट ने साफ कहा- जानबूझखर नजरअंदाज कर रहीं महबूबा

अदालत ने कहा, 'यहां तक कि याचिकाकर्ता भी जम्मू और कश्मीर की विशेष परिस्थितियों को स्वीकार करती हैं, क्योंकि याचिका के राहत भाग में उन्होंने कहा है कि विचाराधीन कैदियों को जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की जेलों में रखा जाए, जब तक कि जेल अधिकारी असाधारण मामलों में 'अपरिहार्य और बाध्यकारी आवश्यकता' साबित करने वाले कारण इस अदालत के समक्ष प्रस्तुत न करें। याचिकाकर्ता ने ऐसे असाधारण मामलों के विवरण को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया है।'

हाईकोर्ट ने दी सीख- अदालत सियासत चमकाने का जरिया नहीं

पीठ ने कहा कि जनहित याचिका को पक्षपातपूर्ण या राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने या अदालत को राजनीतिक मंच में बदलने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'जनहित याचिका राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का तंत्र भी नहीं हैं, और न्यायालय चुनावी अभियानों के लिए एक मंच के रूप में काम नहीं कर सकते हैं।' आदेश में कहा गया 'राजनीतिक दलों के पास मतदाताओं से जुड़ने के कई वैध तरीके हैं, अदालतों को चुनावी लाभ प्राप्त करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।'

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