
कर्नाटक की सत्ता पर काबिज कांग्रेस में कुर्सी के लिए किचकिच नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धासमैया और उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कलह सार्वजनिक मंच पर नजर आ रही है, दूसरी तरफ पार्टी हाईकमान इस पर मौन नजर आ रहा है। पिछले हाल के कुछ वर्षों में जहां भी कांग्रेस की सरकार रही है वहां कुर्सी के लिए आपसी कलह देखने को मिला है। इस वक्त जो कर्नाटक में देखने को मिल रहा है वो कभी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भी देखने को मिला था।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद पर ढाई-ढाई साल वाले कथित फॉर्म्यूले की लड़ाई दिल्ली पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाएंगे। जहां दोनों के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान पर बातचीत होगी। बताया जा रहा है कि शिवकुमार, सिद्धारमैया के ढाई साल तक सीएम की कुर्सी पर बने रहने के बाद अब उस पद को लेकर छोड़ने के लिए दबाब बना रहे हैं, जबकि सिद्धारमैया कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया एक्स के जरिए सीएम सिद्धारमैया को उनका वादा याद दिलाया। उन्होंने सिद्धारमैया पर तंज कसते हुए लिखा कि राज्य में 5 साल की सरकार में जो ढाई-ढाई साल के कार्यकाल का वादा किया गया था उसे पूरा किया जाए। गौरतलब है कि सिद्धारमैया की सरकार ने पिछले 20 नवंबर को अपने कार्यकाल का ढाई साल पूरा कर लिया है। जिसके बाद शिवकुमार सोशल मीडिया के जरिए वादा याद दिला रहे हैं।
कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया X के जरिए सिद्धारमैया पर निशाना साधते हुए लिखा कि शब्दों में बहुत ताकत होती है, शब्द ही दुनिया की असली ताकत है। चाहे वो राष्ट्रपति हों, जज हों, मैं हूं या कोई और हो, सभी को अपने शब्दों का मान रखना चाहिए और अपना वादा निभाना चाहिए।
जब सोशल मीडिया के जरिए डिके शिवकुमार ने सीएम सिद्धारमैया पर निशाना साधा तो मुख्यमंत्री ने भी सोशल मीडिया के जरिए ही पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया X पर अपने काम की एक लिस्ट बनाई और लिखा कि वो इस काम को पूरा करना चाहते हैं। अपने इस पोस्ट के जरिए सिद्धारमैया ने इशारों-इशारों में अपना कार्यकाल पूरा करने का संकेत भी दिया।
जिस तरह कर्नाटक की सत्ता पर काबिज कांग्रेस में सीएम की कुर्सी के लिए खींचतान देखी जा रही है कुछ इसी तरह की खींचतान राजस्थान में भी देखने को मिली थी। जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सीएम की कुर्सी को लेकर जबरदस्त खींचतान चलती रही। बाद में आलाकमान ने इस विवाद को सुलझाने के लिए सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर उन्हें रायपुर भेज दिया।
छत्तीसगढ़ में भी जब भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी तो मुख्यमंत्री बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच खूब खींचतान देखने को मिली थी। यहां भी कहा गया था कि अंदरखाने ढाई-ढाई साल के फॉर्म्यूले के तहत दोनों को मुख्यमंत्री बनन था, लेकिन बघेल ने कुर्सी नहीं छोड़ी। बाद में जब विवाद बढ़ा तो विधानसभा चुनाव से 6 महीने पहले टीएस सिंहदेव को डिप्टी सीएम बना दिया गया।
मध्यप्रदेश में भी जब कमलनाथ के नेतृ्त्व में कांग्रेस की सरकार बनी तब पहले से सक्रिय पार्टी के कई गुट आपसी खींचतान में जुट गए। सीएम की घोषणा होने के पहले कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मुख्यमंत्री बनने को लेकर खूब खींचतान देखने को मिली थी, इसी बीच दिग्विजय सिंह भी अपने लिए प्रदेश में बड़ी भूमिका तलाश रहे थे। आखिरकार कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया, जिसके बाद सियासी गलियारे से खबर आई कि मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह, सिंधिया को साइड लाइन करने में जुट गए थे। नतीजा ये हुआ कि सिंधिया अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए और महज 15 महीने में कमलनाथ की सरकार गिर गई।
राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के बीच आपसी खींचतान का खामियाजा विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा, दोनों जगहों पर कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने सरकार बनाई। हालांकि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृ्त्व कर्नाटक में उपजे विवाद को समय रहते निपटाने की कोशिश में जुटा है और सबकी नजरें राहुल गांधी से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मुलाकात पर टिकी है।
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