
नेपाल की राजधानी धुआं-धुआं हो गया है। जगह-जगह आगजनी से आसमान में धुएं के गुबार उठ रहे हैं। पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, फिर नेपाल के राष्ट्रपति के साथ-साथ सरकार के कई मंत्रियों के इस्तीफे के बाद भी नेपाल में चल रहा विरोध-प्रदर्शन और उग्र हो गया। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन से उकताए प्रदर्शनकारी युवाओं ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, निवर्तमान पीएम ओली और कई बड़े नेताओं के घरों को आग लगा दी है।
इस विरोध की अगुवाई 'जेन जेड' (Gen Z) कर रहे हैं, जो सरकार के सोशल मीडिया बैन के साथ-साथ भ्रष्टाचार और आर्थिक अव्यवस्था को लेकर भी अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। बालेंद्र एक रैपर हैं जिन्होंने राजनीति की राह पकड़ी है। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 2022 का मेयर चुनाव जीता था। जेन जी में उनकी काफी पूछ है और युवा उन्हीं के हाथों नेपाल का शासन सौंपना चाहते हैं।
राजधानी काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह आगजनी की, जिससे धुएं का गुबार छा गया। इस धुएं के कारण विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों की लैंडिंग रोकनी पड़ी। रॉयटर्स के मुताबिक, नेपाल के एविएशन अथॉरिटी के अधिकारी ज्ञानेंद्र भुल ने बताया कि एयरपोर्ट के दक्षिणी तरफ से आने वाली फ्लाइट्स को खराब विजिबिलिटी के कारण लैंडिंग की इजाजत नहीं मिली।
ट्रैकिंग वेबसाइट flightradar24.com के डेटा के अनुसार, कई भारतीय विमानों को नेपाल के आसमान में घंटों इंतजार करना पड़ा। दिल्ली से काठमांडू जाने वाली IndiGo की फ्लाइट 6E1153 और मुंबई से काठमांडू जाने वाली 6E1157 को लैंडिंग की मंजूरी नहीं मिली, जिसके बाद दोनों को लखनऊ एयरपोर्ट डायवर्ट कर दिया गया। एयर इंडिया ने भी दिल्ली-काठमांडू-दिल्ली रूट पर अपनी तीन फ्लाइट्स (AI2231/2232, AI2219/2220 और AI217/218) को मंगलवार के लिए कैंसिल कर दिया। एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने बताया कि वे हालात पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द ही और अपडेट जारी करेंगे।
यह विरोध-प्रदर्शन नेपाल सरकार के उस फैसले के खिलाफ शुरू हुआ, जिसमें उसने इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब और एक्स (पहले ट्विटर) समेत कई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर बैन लगा दिया था। सोमवार को हजारों की संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए और उन्होंने सरकार के इस फैसले को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। ये प्रदर्शन सोशल मीडिया बैन के अलावा सरकार में बढ़ते भ्रष्टाचार और आर्थिक अव्यवस्था के खिलाफ भी था। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन को घेर लिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई।
नेपाल के चीफ सेक्रेटरी और आर्मी चीफ समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने एक संयुक्त अपील जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने और राजनीतिक बातचीत के जरिए इस संकट को खत्म करने की अपील की। नेपाली सेना ने एक्स हैंडल पर जारी अपील में कहा है, ‘काठमांडू सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कल से हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। हम अपनी जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं और संबंधित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।’
अपील में आगे कहा गया है, ‘चूंकि माननीय प्रधानमंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, इसलिए हम सभी आम नागरिकों से इस विषम परिस्थिति में जान-माल के और नुकसान को रोकने के लिए संयम बरतने का अनुरोध करते हैं। हम सभी संबंधित पक्षों से राजनीतिक बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे का जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील करते हैं।’ अपील पत्र पर नेपाल के सेनाध्यक्ष, नेपाल सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव, सशस्त्र पुलिस बल के आईजी, नेपाल पुलिस के आईजी और राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग के प्रमुख के हस्ताक्षर हैं।
हालांकि, प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य शीर्ष नेताओं के घरों में आग लगा दी। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का घर भी शामिल है। लगातार बढ़ते दबाव और विरोध के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इससे पहले, कृषि मंत्री राम नाथ अधिकारी और गृह मंत्री रमेश लेखक ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
देश में बिगड़ते हालात को देखते हुए नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने मंगलवार को एक दुर्लभ सार्वजनिक बयान जारी किया। उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों में हुई मौतों पर दुख जताया और शांति बनाए रखने की अपील की। 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद से यह पहला मौका है, जब पूर्व राजा ने इस तरह के किसी राजनीतिक मुद्दे पर सार्वजनिक बयान दिया है। उन्होंने युवाओं से हिंसा और अराजकता से दूर रहने की अपील की और कहा कि उनकी सुशासन और आर्थिक सुधार की मांगें जायज हैं।
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