Kerala news: केरल में अब कोई भी ‘अत्यंत गरीब’ नहीं, जानिए कैसे बदली लाखों जिंदगियां

Kerala news: केरल ने अपने गठन की 69वीं वर्षगांठ पर ऐलान किया कि राज्य से अत्यधिक गरीबी खत्म हो गई है। 64,006 परिवारों और 1,03,099 व्यक्तियों की पहचान कर आवास, स्वास्थ्य, भोजन और आय आधारित योजनाएं चलाई गईं। 1,000 करोड़ से अधिक खर्च कर सरकार ने यह ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया।

Priya Shandilya, Livemint( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड1 Nov 2025, 07:55 PM IST
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (फाइल फोटो)
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (फाइल फोटो)

Kerala news: केरल ने राज्य से अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन कर दिया है। केरल ने अपने गठन की 69वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की। राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे केरल के लिए एक नई सुबह और "नए केरल" के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।

चुनावी वादे से शुरू हुई पहचान की प्रक्रिया

2021 में सत्ता में आने के बाद विजयन सरकार ने अत्यधिक गरीबी हटाने को प्राथमिकता दी। सरकार बनने के दो महीने के भीतर ही स्थानीय स्वशासन विभाग और केआईएलए ने गरीब परिवारों की पहचान शुरू कर दी।

जनभागीदारी से बना मॉडल

यह कार्य विधायकों, निर्वाचित स्थानीय निकाय सदस्यों, कुदुम्बश्री कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, अधिकारियों और जनता को शामिल करते हुए एक सहभागी मॉडल के माध्यम से किया गया।

पूरे राज्य में विस्तार से पहले, पायलट चरण वडक्कनचेरी नगर पालिका और अंचुथेंगु तथा थिरुनेल्ली ग्राम पंचायतों में चलाया गया था। पहचान प्रक्रिया में वार्ड-स्तरीय डेटा संग्रह, मोबाइल-ऐप-आधारित सूचना संग्रह, सुपर-चेक और ग्राम सभा अनुमोदन शामिल थे।

कितने लोगों को मिली मदद?

1,032 स्थानीय निकायों में 64,006 परिवारों की पहचान हुई

इनमें 1,03,099 व्यक्ति अत्यंत गरीब माने गए

भोजन, स्वास्थ्य, आवास और आय को आधार मानकर योजनाएं बनीं

हर परिवार के लिए लघु, मध्यम और दीर्घकालिक योजनाएं तैयार की गईं

कितना खर्च हुआ इस मिशन में?

सरकार ने आवास, स्वास्थ्य देखभाल और आजीविका सहायता सहित गतिविधियों के लिए 2023-24 और 2024-25 के लिए 50-50 करोड़ और 2025-26 के लिए 60 करोड़ आवंटित किए। कुल मिलाकर, केरल ने अत्यधिक गरीबी उन्मूलन के लिए 1,000 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं।

केरल की गरीबी की पुरानी तस्वीर

1970 में समाज वैज्ञानिक रॉबर्ट एल. हार्डग्रेव ने केरल को सबसे गरीब राज्यों में गिना था। 1961–62 में 90% ग्रामीण और 88% शहरी आबादी गरीबी रेखा से नीचे थी। अब नीति आयोग के मुताबिक गरीबी सिर्फ 0.48% रह गई है।

क्या-क्या मिला गरीब परिवारों को?

"अवकाशम अथिवेगम" अभियान के तहत किए गए प्रयासों से 21,263 ऐसे व्यक्ति जिनके पास बुनियादी दस्तावेज नहीं थे, उन्हें राशन कार्ड, आधार, बैंक खाते, स्वास्थ्य बीमा और जॉब कार्ड जैसी आवश्यक सेवाएं प्राप्त हुईं। खाद्य किट और कुदुम्बश्री के जनकीय होटलों के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

चिकित्सा, टीकाकरण, उपशामक देखभाल और अंग प्रत्यारोपण सहायता सहित स्वास्थ्य सेवाएं चिन्हित परिवारों तक पहुंचीं। रोजगार दिवस, पुनर्वास पहल और आय-सृजन कार्यक्रमों के माध्यम से आजीविका का सृजन किया गया।

बिना घर वाले परिवारों को आवास प्रदान किया गया, जबकि जिनके पास न जमीन थी और न ही घर, उन्हें दोनों मिले। अत्यंत गरीब परिवारों के लिए घर की मरम्मत के लिए सहायता राशि 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दी गई।

कुछ अहम आंकड़े

एक विशेष अभियान के तहत वितरण के लिए 28 एकड़ जमीन की पहचान की गई। "सुमनसोदिथिरी मन्नू" अभियान के माध्यम से अतिरिक्त 2.03 एकड़ जमीन प्राप्त हुई। आजीविका सहायता से 4,394 परिवारों को आय अर्जित करने में मदद मिली और कुदुम्बश्री की "उज्जीवनम" योजना के माध्यम से 3,822 व्यक्तियों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।

कुल 35,041 परिवारों को मनरेगा के अंतर्गत लाया गया और 228 को प्रत्यक्ष आजीविका सहायता प्राप्त हुई। 5,132 परिवारों को राशन कार्ड जारी किए गए। 5,583 बच्चों को शैक्षिक सहायता प्रदान की गई, जिनमें से 331 को छात्रवृत्तियां मिलीं और छात्रों को निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई।

62 लाख परिवारों को कल्याणकारी पेंशन, 4.70 लाख बेघर परिवारों को घर, लगभग 6,000 पारिवारिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, 43 लाख परिवारों को निशुल्क स्वास्थ्य बीमा और चार लाख भूमिहीन परिवारों को भूमि प्रदान करने से गरीबी और असुरक्षा में उल्लेखनीय कमी आई है।

331 परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए गए। 428 एकल-सदस्यीय परिवारों के लिए आश्रय गृहों की व्यवस्था की गई और 520 अन्य परिवारों को सुरक्षित आवासों में स्थानांतरित किया गया।

दशकों की मेहनत का नतीजा

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी उन्मूलन में केरल की सफलता दशकों के जन संघर्षों और प्रगतिशील शासन का परिणाम है। 1950 और 1960 के दशक में भूमि सुधारों और सार्वभौमिक राशनिंग से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को मजबूत करने तक, केरल ने सामाजिक विकास की एक मजबूत नींव रखी।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन एक नए दौर की शुरुआत है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि अत्यधिक गरीबी से बाहर आया कोई भी परिवार वापस गरीबी में न जाए।

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