Nepal KP Oli news: नेपाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। अपदस्थ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने शनिवार को अंतरिम कार्की सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इसे 'पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक' करार दिया और साथ ही भारत पर भी बिना नाम लिए तंज कसा।
पहली सार्वजनिक बैठक
तीन महीने पहले जेन-जेड के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक सभा थी। यहां उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी CPM-UML फिर से मजबूती के साथ उभरेगी और देश का नेतृत्व करेगी।
भारत पर बिना नाम लिए कटाक्ष
चीन समर्थक माने जाने वाले ओली ने अपने भाषण में भारत का नाम लिए बिना कई बार तंज कसा। उन्होंने 2015 में संविधान लागू करने और नेपाल को चीन से जोड़कर ‘भू-संपर्कित देश’ बनाने से जुड़े समझौतों का जिक्र किया। ओली के मुताबिक, इन कदमों पर 'बाहरी तत्वों' ने आपत्ति जताई थी।
सीमा विवाद का इशारा
ओली ने सीमाओं की रक्षा और संप्रभुता जताने पर मिली तीखी प्रतिक्रियाओं का भी उल्लेख किया। यह बयान सीधे तौर पर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों से जुड़े विवाद की ओर इशारा माना जा रहा है, जिन पर भारत अपना दावा करता है।
Gen-Z समझौते को बताया फर्जी
ओली ने यह भी कहा कि अंतरिम सरकार चुनाव-अनुकूल माहौल बनाने के बजाय असंवैधानिक कामों में लगी है। उन्होंने अंतरिम सरकार और जेन-जेड समूह के बीच हुए हालिया समझौते को फर्जी करार दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता देश को टकराव की ओर धकेलने की एक साजिश है और इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
कार्रवाई की मांग
उन्होंने सितंबर में हुए जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई तोड़फोड़ और नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। ओली का कहना था कि बिना जवाबदेही तय किए आगे बढ़ना गलत मिसाल कायम करेगा।
चुनाव और सुप्रीम कोर्ट पर उम्मीद
ओली ने साफ किया कि वह अगले साल पांच मार्च को होने वाले चुनावों से भागने वाले नहीं हैं। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल का उच्चतम न्यायालय, प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को बहाल करेगा। साथ ही उन्होंने लगातार तीसरी बार पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान किया।
ओली के इस बयान से साफ है कि नेपाल की राजनीति में शांत दौर अभी दूर है। अंतरिम सरकार, जेन-जेड आंदोलन और पड़ोसी देशों से रिश्तों को लेकर आने वाले महीनों में सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।