Land-for-jobs scam: दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और कई अन्य लोगों के खिलाफ जमीन के बदले नौकरी घोटाले में आरोप तय करने का आदेश दिया है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है और अब अदालत ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
क्या कहा जज ने
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें, जिसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की।
कितने लोग फंसे, कितने बरी
अदालत ने इस मामले में कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। वहीं रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को इस केस में बरी कर दिया गया है। इससे साफ है कि कोर्ट ने हर आरोपी की भूमिका को अलग-अलग नजरिए से परखा है।
इससे पहले, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है।
23 जनवरी को तय होंगे औपचारिक आरोप
कोर्ट ने इस मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख मुकर्रर की है। इसी दिन से मामले की सुनवाई का अगला चरण शुरू होगा, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
किन पर है जमीन के बदले नौकरी का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान 2004 से 2009 के बीच मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे जोन में ग्रुप-डी की भर्तियां की गईं। इसके बदले में नौकरी पाने वालों ने यादव परिवार के सदस्यों या उनके करीबी सहयोगियों के नाम जमीन के टुकड़े ट्रांसफर किए या तोहफे में दिए।
नियमों के उल्लंघन और बेनामी संपत्ति का दावा
CBI का कहना है कि ये नियुक्तियां तय नियमों को दरकिनार कर की गईं और जमीन के ये लेन-देन बेनामी संपत्तियों के रूप में सामने आए। एजेंसी ने इसे आपराधिक कदाचार और साजिश करार दिया है।
मामले में नामजद सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि यह केस राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।