
लोकसभा ने आज मनरेगा का नाम बदलने और योजना में कई बदलाव करने वाले विकसित भारत-जी राम जी विधेयक को मंजूरी दे दी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। मतदान के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया और कई सांसदों ने बिल की कॉपी के कागज फाड़कर सदन में फेंके। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मनरेगा का स्थान लेने वाले वीबी-जी-राम-जी विधेयक पर बुधवार मध्यरात्रि तक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से महिला, युवा, गरीबों की जिंदगी बदलने का काम कर बापू के आदर्शों को जिंदा रखने का काम किया गया है। यह गरीबों की जिंदगी बदलेगा और आदर्श ग्राम की स्थापना करेगा जिसमें लोगों को सभी प्रकार की सुविधाएं उनकी पहुंच में होगी। उन्होंने कहा कि हम किसी से भेदभाव नहीं करते हैं। बापू हमारी प्रेरणा और श्रद्धा हैं। पूरा देश हमारे लिए एक है। हमारे विचार संकीर्ण और संकुचित नहीं है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने मनरेगा को पूरी तरह से भ्रष्टाचार के हवाले कर दिया था। उन्होंने कहा कि असल मायने में मनरेगा के फंड का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि नरेगा को महात्मा गांधी के नाम के साथ शुरू नहीं किया गया था। उन्होंने 2009 के चुनावों से पहले वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा था। उन्होंने कहा कि यूपीए ने अपने कार्यकाल में इस पर सिर्फ 2.13 लाख करोड़ रुपए खर्च किये जबकि मोदी सरकार ने 2014 से इस पर 8.53 लाख करोड़ रुपए खर्च किये हैं। उन्होंने कहा कि पहले इसमें भ्रष्टाचार था लेकिन मोदी सरकार ने इसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाया है।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विधेयक पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे मनरेगा को खत्म करने की साजिश बताया। इस दौरान कुछ सदस्यों ने कागज फाड़कर आसन के पास उड़ाए। विपक्ष के हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज चौहान ने कहा कि बिल फाड़ना गांधीजी की अहिंसा की नीति के खिलाफ है। वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में हंगामा नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। इसके बाद भी हंगामा नहीं रूकने पर सदन की कार्यवाही को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
इस विधेयक में अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए अब 100 दिन के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। बिल की धारा 22 के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड साझा करने का अनुपात 60:40 होगा। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए यह अनुपात 90:10 होगा। बिल की धारा 6 राज्य सरकारों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि पहले से अधिसूचित करने की अनुमति देती है, जिसमें बुवाई और कटाई जैसे व्यस्त कृषि सीजन शामिल होंगे। इस घोषित अवधि के दौरान, इस बिल के तहत कोई भी काम शुरू या निष्पादित नहीं किया जाएगा।
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