महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र इस बार सिर्फ 7 दिनों का होगा, लेकिन इसकी लागत ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। 8 से 14 दिसंबर तक पुणे में होने वाले इस सत्र पर सरकार 90 करोड़ रुपए खर्च करेगी, जिसकी आधिकारिक पुष्टि आज की गई। यानी हर रोज लगभग 12 करोड़ 85 लाख रुपए से अधिक का खर्च आएगा। पहले प्रस्तावित दो सप्ताह के कार्यक्रम को घटाकर सिर्फ एक सप्ताह कर दिया गया है। विधानसभा और विधान परिषद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
7 दिन के सत्र में 90 करोड़ रुपए का खर्च
सरकारी अनुमानों के मुताबिक, इस 7 दिवसीय सत्र पर होने वाला खर्च अनेक मदों पर विभाजित है; मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और स्टाफ के ठहरने, सुरक्षा, कार्यालय मरम्मत और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी राशि खर्च की जाएगी। सिर्फ विधायकों, सांसदों और उनके सहायकों के भोजन पर 40 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं। नागपुर की जगह पुणे में सत्र होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी बड़ा खर्च किया जा रहा है। सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, संचार सुविधाएं, मेडिकल सहायता और अग्निशमन तंत्र को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बड़ी घोषणा की संभावना बेहद कम
सत्र के दौरान विधायी कार्यों के साथ विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा और राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, 21 दिसंबर तक लागू स्थानीय निकाय चुनाव की आचार संहिता के कारण बड़ी नीतिगत घोषणाओं की संभावना कम है। इस बार सत्र में किसान मुद्दे, महंगाई, नागरिक परेशानियां और जनहित से जुड़े कई बड़े मामले प्रमुख रूप से उठने की उम्मीद है। विपक्ष किसानों की आत्महत्या, फसल नुकसान और राहत पैकेज को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।