भाजपा का कार्यक्रम था, मैं कैसे जाती?, ममता के एक बयान से गरमाई बंगाल की राजनीति, आमने-सामने TMC-BJP

भगवद्गीता पाठ कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर ममता बनर्जी के बयान ने बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है। उन्होंने इसे भाजपा से जुड़ा आयोजन बताते हुए दूरी बनाए रखने की बात कही और बंगाल की अस्मिता व विचारधारा का हवाला दिया। राज्यपाल की मौजूदगी और भाजपा नेताओं के तीखे सवालों ने विवाद को और बढ़ाया।

Rishabh Shukla
अपडेटेड8 Dec 2025, 06:05 PM IST
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(HT)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भगवद्गीता पाठ कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इसे पूरी तरह राजनीतिक फैसला बताया। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सनातन संस्कृति संसद द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में लाखों लोगों की मौजूदगी के बावजूद ममता वहां नहीं पहुंचीं। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम निष्पक्ष नहीं था और भारतीय जनता पार्टी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था, इसलिए उनके लिए इसमें शामिल होना संभव नहीं था।

बंगाल, विचारधारा और भाजपा पर तीखा हमला

ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह सभी धर्मों, जातियों और पंथों का सम्मान करती हैं, लेकिन किसी पार्टी विशेष से जुड़े आयोजन में नहीं जातीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसे विचारकों और महापुरुषों की विचारधारा का सम्मान नहीं करती, जिनसे बंगाल की आत्मा जुड़ी है। ममता ने कहा, जो लोग नेताजी सुभाष चंद्र बोस से नफरत करते हैं, महात्मा गांधी के आदर्शों को नहीं मानते और बंगाल का अपमान करते हैं, मैं उनके साथ नहीं हूं।

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राज्यपाल की मौजूदगी और विपक्ष का पलटवार

कार्यक्रम में राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस की मौजूदगी ने राजनीतिक बहस को और धार दे दी। विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक सच्चे हिंदू को ऐसे आयोजनों में शामिल होने से परहेज नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, इस तरह की दूरी आस्था पर सवाल खड़े करती है। भाजपा ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे विचारधारात्मक स्पष्टता बताया।

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संसद में वंदे मातरम् की बहस ने माहौल गरमाया

इसी बीच संसद में वंदे मातरम् को लेकर चल रही बहस ने माहौल और गरमा दिया है। ममता बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि अगर वह नेताजी, रवींद्रनाथ टैगोर और राजा राम मोहन राय को सम्मान नहीं देती, तो आखिर किन आदर्शों का पालन करती है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम् को स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणादायक शक्ति बताते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक करार दिया।

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