
12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया के विमान हादसे ने देश-दुनिया को हिलाकर रख दिया। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए कई स्तर पर जांच चल रही है। इस बीच विमानन क्षेत्र की केंद्रीय नियामक संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने देश के प्रमुख हवाई अड्डों की हालत, विमानों के रखरखाव आदि की निगरानी का निगरानी अभियान चलाया। हैरानी की बात है कि डीजीसीए ने जांच प्रक्रिया में कई स्तर पर गड़बड़ियां पाईं।
डीजीसीए ने सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई बड़े हवाई अड्डों की जांच की और कई तरह की खामियों का पता लगाया। उड़ानों के संचालन; उड़ान अनुकूल परिस्थितियों; रैंप की सुरक्षा; एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC); कम्यूनिकेशन, नेविगेशन और सर्विलांस (CNS) सिस्टम्स के साथ-साथ उड़ान से पहले चिकित्सा सुविधाओं की पड़ताल की गई। जांच के बाद डीजीसीए ने कहा, 'नियामक आवश्यकताओं के अनुपालन की जांच करने और सुधार के लिए कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने के लिए निगरानी के दौरान जमीनी गतिविधियों और विमानों की आवाजाही पर बारीकी से नजर रखी गई।'
डीजीसीए ने किसी एयरलाइन का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उसने कहा कि एक खास विमान में बताने के बाद भी बार-बार गड़बड़ियां सामने आती दिखीं। उसने कहा, 'इससे पता चलता है कि निगरानी का व्यवस्था निष्प्रभावी है और गड़बड़ियों को सुधारा नहीं जाता है।' डीजीसीए ने यह भी पाया कि बैगेज ट्रॉली, बैगेज फ्रेट लोडर जैसे ग्राउंड हैंडलिंग उपकरण अनुपयोगी पाए गए। हालांकि, नियामक ने उन हवाई अड्डों खुलासा नहीं किया जहां ये कमियां पाई गईं।
डीजीसीए ने जांच में यह भी पाया कि एक विशेष एयरलाइन के विमान के रखरखाव के दौरान वर्क ऑर्डर का पालन नहीं किया जा रहा था। डीजीसीए ने पाया कि इंजीनियर एयक्राफ्ट मेंटनेंस मैनुअल के अनुसार सुरक्षा सावधानियों का पालन नहीं कर रहे थे। डीजीसीए ने कहा, 'इंजीनियर गड़बड़ी को ठीक करने में दिलचस्पी नहीं ले रहा था और एयरक्राफ्ट सिस्टम में जो दोष रिपोर्ट की जा रही थी, वो टेक्निकल लॉगबुक में दर्ज नहीं मिले। कई जीवन रक्षक जैकेट निर्दिष्ट सीटों के नीचे ठीक से सुरक्षित नहीं थे और दाईं ओर के विंगलेट के निचले ब्लेड पर जंग रोधी टेप क्षतिग्रस्त पाया गया।'
एक अन्य हवाई अड्डे पर डीजीसीए ने पाया कि रनवे की बीच की रेखा फीकी पड़ गई थी, और रैपिड एग्जिट टैक्सीवे पर बीच में पड़ रही हरी रोशनी एक ही दिशा में पड़ रही थी। हवाई अड्डे के आसपास नए निर्माण के बावजूद पिछले तीन वर्षों से अवरोध सीमा का आंकड़ा अपडेट नहीं किया गया था। ऑब्सट्रक्शन लिमिटेशन डेटा एक ऐसी प्रणाली का हिस्सा है जो हवाई अड्डे को हवाई अड्डे के आसपास की वस्तुओं के लिए अधिकतम स्वीकार्य ऊंचाई निर्धारित करने में मदद करता है। DGCA ने एक सिम्युलेटर की भी जांच की जो विमान की जरूरत से मेल नहीं खाता था।
तीसरे हवाई अड्डे पर एक विमान कंपनी की घरेलू उड़ान घिसे हुए टायरों के कारण रुकी रही और उसे ठीक करने के बाद ही छोड़ा गया। डीजीसीए ने कहा, 'संबंधित ऑपरेटरों को निगरानी के दौरान पाई गई सभी गड़बड़ियों को सात दिनों के भीतर सुधारने को कहा गया है। सिस्टम में खतरों का पता लगाने के लिए व्यापक निगरानी की यह प्रक्रिया भविष्य में भी जारी रहेगी।'
डीजीसीए ने 19 जून को देशभर में पूरे विमानन पारिस्थितिकी तंत्र (Aviation Ecosystem) की विशेष निगरानी करने का आदेश जारी किया था। यह कदम एयर इंडिया विमान दुर्घटना के लगभग एक सप्ताह बाद उठाया गया है। इस अभ्यास के तहत एयरलाइंस, एमआरओ और प्रशिक्षण संस्थानों के कार्यालयों में भी ऑडिट किया जाएगा।
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