ट्रेड वॉर की दस्तक? भारत-चीन समेत एशियाई देशों पर मेक्सिको का टैरिफ वार

मेक्सिको ने भारत, चीन और कई एशियाई देशों से आने वाले सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने को मंजूरी दे दी है। यह कदम घरेलू निर्माताओं को बचाने और सरकारी राजस्व बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। नए शुल्क 2025 और 2026 से लागू होंगे, जिनका सबसे अधिक असर ऑटो, ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल और स्टील उत्पादों पर पड़ेगा।

Rishabh Shukla
अपडेटेड11 Dec 2025, 09:56 PM IST
मेक्सिको का झंडा
मेक्सिको का झंडा (freepik )

अमेरिका के बाद अब मेक्सिको ने भी भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों के उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने का कदम उठा लिया है। देश की सीनेट ने 50% तक बढ़े हुए टैरिफ को मंजूरी देकर साफ संदेश दे दिया है कि वह स्थानीय उद्योगों को बाहरी दबाव से बचाने के लिए बड़े और सख्त आर्थिक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा। नया टैरिफ ढांचा 2025 से लागू होगा और यह घरेलू व्यापार समूहों तथा प्रभावित देशों द्वारा जताई गई आपत्तियों के बावजूद पास किया गया है। खास बात यह है कि यह कदम उस समय सामने आया है जब मेक्सिको जल्द ही USMCA की अहम समीक्षा में शामिल होने वाला है।

किन सामानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?

नए नियमों के तहत 2026 से कुछ खास श्रेणियों के उत्पादों जैसे ऑटो, ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल, प्लास्टिक और स्टील पर 50% तक शुल्क लगाया जाएगा। जबकि अन्य सामान्य उत्पादों पर 35% तक की दर तय की गई है। सरकार का अनुमान है कि इन नए टैक्स बदलाओं से अगले वर्ष लगभग 3.76 बिलियन डॉलर अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। मेक्सिको का उद्देश्य बढ़ते राजकोषीय घाटे को संतुलित करना और घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाना है, जो विदेशी आयातित उत्पादों से लगातार प्रतिस्पर्धा झेल रहे हैं।

भारत-मेक्सिको व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?

भारत और मेक्सिको के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार तेजी से बढ़ा है। 2020 के 4.25 अरब डॉलर के मुकाबले 2024 में भारतीय निर्यात लगभग दोगुना होकर 8.98 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं मेक्सिको से आयात 2024 में घटकर 2.74 अरब डॉलर रह गया, जिससे भारत को इस व्यापारिक संबंध में बड़ा सरप्लस मिल रहा है। मेक्सिको में भारतीय उत्पादों विशेषकर मोटरसाइकिल, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल सामान, ऑर्गेनिक केमिकल और दवाइयों की मांग लगातार बढ़ रही थी, जिस पर अब बढ़े हुए टैरिफ का सीधा प्रभाव पड़ेगा।

भारतीय कंपनियों के लिए नई चुनौती

मेक्सिको भारतीय ऑटो और दोपहिया उद्योगों के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार बन चुका है। कई भारतीय कंपनियां अपनी मोटरसाइकिल और तीन पहिया गाड़ियां वहां बड़ी मात्रा में बेचती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि 50% तक के टैरिफ के बाद भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हो सकती है और कई उत्पाद मेक्सिकन बाजार में महंगे हो जाएंगे। इसके बावजूद यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय कंपनियां स्थानीय साझेदारों, एसेंबली यूनिट्स और नए व्यापार मॉडलों के जरिए इस चुनौती का समाधान तलाश सकती हैं।

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