लोकसभा ने आज भारी हंगामे के बीच विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025 को पारित कर दिया, जिसके बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को कमजोर करने वाला कदम करार दिया। वहीं, भाजपा ने इस विधेयक को ग्रामीण भारत के लिए सुधारात्मक और जनकल्याणकारी बताया।
विपक्ष ने लगाया मनरेगा को खत्म करने की साजिश का आरोप
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने विधेयक को गरीब विरोधी बताते हुए कहा कि यह मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि 125 दिन की मजदूरी का प्रावधान केवल दिखावा है, क्योंकि राज्य सरकारों पर बढ़ता वित्तीय बोझ अंततः योजना को निष्प्रभावी बना देगा। समाजवादी पार्टी, द्रमुक सहित कई दलों ने महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को अपमानजनक बताया।
गांधी के नाम पर संसद में तीखी बहस
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव और द्रमुक सांसद कनिमोझी ने आरोप लगाया कि सरकार गांधी जी के विचारों से विमुख हो चुकी है। विपक्ष का कहना है कि इस विधेयक से केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किसे रोजगार मिले और किसे नहीं, जिससे योजना की आत्मा खत्म हो जाएगी। विपक्षी सांसदों द्वारा सदन में बिल की कॉपी फाड़ने पर लोकसभा अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति भी जताई।
भाजपा ने बताया- गरीबों के लिए ऐतिहासिक सुधार
भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि लंबी चर्चा के बाद विधेयक पारित हुआ, लेकिन विपक्ष सुनने को तैयार नहीं था। वहीं, संबित पात्रा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि 1.51 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रावधान के साथ 125 दिन की रोजगार गारंटी और ग्रामीण ढांचे को मजबूती मिलेगी। भाजपा का दावा है कि यह विधेयक ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा।
क्या है VB-GRAM?
इस विधेयक में अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए अब 100 दिन के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। बिल की धारा 22 के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड साझा करने का अनुपात 60:40 होगा। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए यह अनुपात 90:10 होगा। बिल की धारा 6 राज्य सरकारों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि पहले से अधिसूचित करने की अनुमति देती है, जिसमें बुवाई और कटाई जैसे व्यस्त कृषि सीजन शामिल होंगे। इस घोषित अवधि के दौरान, इस बिल के तहत कोई भी काम शुरू या निष्पादित नहीं किया जाएगा।