MGNREGA: विकसित भारत जी राम जी योजना होगी मनरेगा, 100 से बढ़कर 125 हुए काम के दिन

MGNREGA New Name: लाखों ग्रामीण परिवारों की जिंदगी का आधार बनी मनरेगा योजना में केंद्र सरकार ने किया ऐतिहासिक बदलाव। अब यह विकसित भारत जी राम जी के नाम से जानी जाएगी और काम की गारंटी 100 दिन से बढ़कर 125 दिन होगी।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड18 Dec 2025, 02:22 PM IST
मनरेगा के तहत बढ़ी रोजगार गारंटी (फाइल फोटो)
मनरेगा के तहत बढ़ी रोजगार गारंटी (फाइल फोटो)(PTI )

MGNREGA Name Changed: केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) में व्यापक बदलाव को हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना का नाम बदलकर अब 'विकसित भारत जी राम जी (VB G RAM G) किए जाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। 2005 में लागू हुई मनरेगा ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाने का एक प्रमुख सरकारी उपकरण रही है।

काम के दिनों में 25% की बढ़ोतरी

इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण और राहत भरा पहलू है। नए प्रावधान के तहत मनरेगा में मौजूदा 100 दिनों के काम की गारंटी को बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया जाएगा। यह फैसला उन लाखों ग्रामीण मजदूरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से काम के दिनों को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। दरअसल, मनरेगा अधिनियम की धारा 3(1) प्रति ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 'कम से कम एक सौ दिन' के काम का प्रावधान करती है, लेकिन यह सीमा कई बार ऊपरी सीमा बन जाती है।

कई राज्यों, जैसे आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान ने पहले ही 100 दिन की कार्य सीमा बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि राज्य 100 दिनों से अधिक काम प्रदान कर सकते थे, लेकिन इसकी फंडिंग उन्हें स्वयं करना पड़ता था, जो बहुत कम राज्य ही करते थे। नए बदलाव के बाद, 125 दिन के काम की गारंटी सीधे तौर पर केंद्र सरकार की तरफ से मिलेगी।

औसतन कम काम और रिकॉर्ड तोड़ मांग

मनरेगा के तहत काम की मांग और वास्तविक रोजगार के बीच एक दिलचस्प विरोधाभास हमेशा रहा है। भले ही कानून में 100 दिनों के काम की गारंटी है, लेकिन वर्ष 2024-25 में प्रति परिवार उपलब्ध कराए गए औसत रोजगार के दिन लगभग 50 ही रहे। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 100 दिन का काम पूरा करने वाले परिवारों की संख्या 40.70 लाख थी। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में यह सीमा पार करने वाले परिवारों की संख्या केवल 6.74 लाख है।

योजना ने 2005 से अब तक 4,872.16 करोड़ व्यक्ति दिवस सृजित किए हैं और कुल 11,74,692.69 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 2020-21 में कोविड महामारी के दौरान काम की मांग में जबरदस्त उछाल आया था, जब रिकॉर्ड 7.55 करोड़ ग्रामीण परिवारों ने इसका लाभ उठाया, जिसने प्रवासियों के लिए एक जीवन-रक्षक सुरक्षा कवच का काम किया था। हालांकि, पिछले चार वर्षों में काम करने वाले परिवारों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आई है।

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भविष्य की योजनाएं और बड़े फंड की दरकार

यह व्यापक बदलाव ऐसे समय में आया है जब सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने वाले सोलहवें वित्त आयोग के पुरस्कारों में भी योजना को जारी रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने व्यय वित्त समिति (EFC) को योजना को जारी रखने के लिए एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें 2029-30 तक पांच साल के लिए 5.23 लाख करोड़ रुपये के बड़े आउटले की मांग की गई है। यह राशि इस बात का संकेत है कि सरकार इस योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एक मजबूत स्तंभ के रूप में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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खास परिस्थितियों में अतिरिक्त काम की सुविधा

यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि मनरेगा पहले से ही कुछ खास परिस्थितियों में अतिरिक्त दिनों के रोजगार की अनुमति देती रही है। उदाहरण के लिए, वन क्षेत्र में प्रत्येक अनुसूचित जनजाति का परिवार 150 दिन का काम पाने का हकदार है। वहीं, सूखा या किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भी अतिरिक्त 50 दिन का काम प्रदान किया जा सकता है।

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