ASI का एकाधिकार खत्म: 3,700 स्मारकों के संरक्षण में अब निजी कंपनियों की एंट्री, क्या बदल जाएगी आपके शहर की विरासत?

भारत के 3,700 संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के लिए अब प्राइवेट एजेंसियां भी काम कर सकेंगी। संस्कृति मंत्रालय अगले दो हफ्तों में ASI के एकाधिकार को खत्म कर निजी कंपनियों को कोर रेस्टोरेशन की अनुमति देगा। अब बुनियादी सुविधाओं के बजाय सीधे ऐतिहासिक ढांचों की मरम्मत निजी हाथों में होगी।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड9 Jan 2026, 05:58 PM IST
अब प्राइवेट प्लेयर भी कर पाएंगे ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण (सांकेतिक तस्वीर)
अब प्राइवेट प्लेयर भी कर पाएंगे ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण (सांकेतिक तस्वीर)

भारत के ऐतिहासिक स्मारकों के पास से गुजरते समय अक्सर हमें जर्जर दीवारें और सुस्त रफ्तार से चलता काम दिखता था। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि सरकारी तंत्र (ASI) पर बढ़ते बोझ के कारण सैकड़ों स्मारक अपनी चमक खो रहे थे। लेकिन अब, पहली बार केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए प्राइवेट कंजर्वेशन एजेंसियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। यह कदम न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय विरासत को बचाने में आम लोगों और कॉरपोरेट्स की भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

क्या अब प्राइवेट कंपनियां हमारे स्मारकों की मरम्मत करेंगी?

जी हां, यह एक बड़ा बदलाव है। अब तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ही स्मारकों के संरक्षण की योजना बनाता था और उसे लागू करता था। नई नीति के तहत, निजी कंपनियां अपनी कॉर्पोरेट की सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) निधि का उपयोग करके न केवल पैसा देंगी, बल्कि अपनी पसंद की विशेषज्ञ एजेंसी से काम भी करवा सकेंगी। सरकार ने 250 ऐसे स्मारकों की सूची तैयार की है जिन्हें तुरंत मरम्मत की जरूरत है।

'एडॉप्ट ए हेरिटेज' योजना से यह कितना अलग है?

पुरानी योजना में कंपनियां केवल शौचालय, टिकट काउंटर या रास्ते जैसे बुनियादी ढांचे ही बना सकती थीं। वे मुख्य स्मारक या उसकी दीवारों को हाथ नहीं लगा सकती थीं। लेकिन नई व्यवस्था में, कंपनियां 'कोर कंजर्वेशन' यानी स्मारक की मुख्य संरचना की मरम्मत में शामिल होंगी। अगर परिणाम और प्रभाव के नजरिए से देखा जाए तो स्मारकों के संरक्षण की गति को तीन गुना तक बढ़ा सकता है, क्योंकि अब काम डेडलाइन के भीतर पूरा करना होगा।

इन एजेंसियों का चयन कैसे होगा और नियम क्या हैं?

मंत्रालय ने संरक्षण आर्किटेक्ट्स और अनुभवी एजेंसियों से आवेदन मांगे हैं। 12 जनवरी तक आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, एक हाई-लेवल कमेटी इनकी जांच करेगी। पात्रता के लिए एजेंसी के पास कम से कम 100 साल पुराने स्मारकों को पुनर्जीवित करने का अनुभव होना अनिवार्य है। भले ही काम निजी एजेंसी करेगी, लेकिन उसकी निगरानी और अंतिम अप्रूवल का अधिकार अभी भी एएसआई के पास ही रहेगा ताकि ऐतिहासिक स्थापनाओं से समझौता न हो।

'भारत' और स्थानीय निवासियों के लिए इसके क्या मायने हैं?

उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों के छोटे शहरों में स्थित गुमनाम स्मारकों के लिए यह संजीवनी है। अक्सर फंड की कमी से स्थानीय धरोहरें उपेक्षित रह जाती थीं। अब स्थानीय उद्योगपति या बड़े घराने अपने क्षेत्र के विशेष स्मारकों को गोद लेकर उन्हें टूरिस्ट हब में बदल सकेंगे। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि हेरिटेज सेक्टर में कुशल प्रोफेशनल्स की एक नई खेप भी तैयार होगी।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़न्यूज़ASI का एकाधिकार खत्म: 3,700 स्मारकों के संरक्षण में अब निजी कंपनियों की एंट्री, क्या बदल जाएगी आपके शहर की विरासत?
More
बिजनेस न्यूज़न्यूज़ASI का एकाधिकार खत्म: 3,700 स्मारकों के संरक्षण में अब निजी कंपनियों की एंट्री, क्या बदल जाएगी आपके शहर की विरासत?