Fake News Alert: गलत सूचना फैलाने की लत सिर्फ इंसानों की नहीं, मछली और बैक्टीरिया भी फैलाते हैं अफवाह: स्टडी

Misinformation in Nature: कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी में बताया है कि 'गलत सूचना' यानी मिसइन्फॉर्मेशन का अनुभव केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मछली, मक्खियों और बैक्टीरिया जैसे जीव भी इसका शिकार होते हैं। यह उनके अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड14 Dec 2025, 05:25 PM IST
इंसान ही नहीं, जानवर भी फैलाते हैं 'फेक न्यूज' (AI Generated Graphic)
इंसान ही नहीं, जानवर भी फैलाते हैं 'फेक न्यूज' (AI Generated Graphic)(Notebook LM)

Biological Misinformation: साइबर दुनिया में गलत सूचना के तेजी से फैलने की बात तो आपने सुनी होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत सूचना का यह अनुभव सिर्फ मनुष्य ही नहीं करते? विज्ञान कहता है कि यह जीवों के प्राकृतिक संसार का भी एक हिस्सा है।

हाल ही में हुए एक रिसर्च के अनुसार, मछली, मक्खियों और यहां तक कि बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्म जीव भी एक-दूसरे को गलत जानकारी देते या उसका शिकार होते हैं। कॉर्नेल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने जर्नल इंटरफेस में प्रकाशित एक अध्ययन में इस महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला है।

मछलियों के व्यवहार से शुरू हुई रिसर्च

कॉम्प्यूटेशनल जीवविज्ञानी और इस अध्ययन के लेखकों में से एक एंड्रयू हेन ने के अनुसार, उन्हें उम्मीद है कि हम इन प्राकृतिक प्रणालियों से कुछ सीख सकते हैं। हेन की रुचि इस विषय में तब जगी, जब वे फ्रेंच पोलिनेशिया के मो'रिया द्वीप के पास मूंगा चट्टानों के चारों ओर तैरती हुई मछलियों के झुंडों का अध्ययन कर रहे थे।

मछलियां बड़े समूहों में रहने से सुरक्षा और शिकारियों से सामूहिक रूप से सतर्क रहने जैसे फायदे पाती हैं, जो उन्हें अकेले नहीं मिलते। जब एक मछली को खतरा लगता है, तो वह दूसरी दिशा में भागती है और यह जानकारी पूरे झुंड में फैल जाती है, जिससे सभी एक साथ भाग निकलते हैं।

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झूठे अलार्म और गलत सूचना का प्रवाह

रिसर्चर हेन इस बात से हैरान थे कि मछलियां कितनी बार गलती करती थीं। उन्होंने बताया कि कई बार बिना किसी खतरे के भी मछली 'अपनी जान बचाने' के लिए भागने लगती थी। हेन ने देखा कि जब कोई मछली बिना कारण भागती, तो दूसरी मछलियां उसे देखकर भागने लगतीं।

जल्द ही पूरा झुंड बिना किसी खतरे के एक साथ भागने की कोशिश करने लगता था। इस ऑब्जर्वेशन ने हेन को इंटरनेट पर गलत सूचना के फैलने के तरीकों के बारे में सोचने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, 'यह मेरे दिमाग में बैठ गया कि हम यहां क्या देख रहे हैं। हम गलत सूचना के प्रवाह देख रहे हैं।'

बैक्टीरिया और सोशल नेटवर्क में गलत सूचना

हेन और उनके साथियों ने कई अन्य जीवों में भी ऐसे ही गलत सूचना के प्रवाहों का सर्वे किया। बबून से लेकर दीमक तक, बड़े समूहों में रहने वाले जानवर लगातार एक-दूसरे को जानकारी देते रहते हैं, जिससे गलत सूचना घुसने की संभावना पैदा होती है।

यहां तक कि बैक्टीरिया भी अपने पर्यावरण के बारे में एक-दूसरे को संकेत भेजते हैं, ताकि हमलों के खिलाफ सामूहिक रूप से अपनी रक्षा कर सकें। हमारे शरीर के भीतर, प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं भी बीमारियों से लड़ते हुए लगातार संवाद करती रहती हैं।

गणितीय मॉडल से गलत सूचना की स्टडी

प्राकृतिक दुनिया में गलत सूचना कैसे पैदा होती है, इस पर बहुत कम रिसर्च हुई है, क्योंकि इसका अध्ययन करना वाकई कठिन है। हेन कहते हैं, 'आप एक बैक्टीरिया से यह नहीं पूछ सकते कि क्या आपने उस दूसरे बैक्टीरिया ने जो कहा उस पर विश्वास किया या नहीं?'

इस चुनौती को देखते हुए हेन और उनके सहयोगियों ने किसी भी प्रजाति में गलत सूचना की जांच के लिए गणितीय मॉडल विकसित किए। शोधकर्ता इन मॉडलों का उपयोग करके यह अनुमान लगा सकते हैं कि कोई जीव अपने विश्वासों में कितना सही है और दूसरे जीवों से मिली जानकारी से उसके विश्वास कितने बदलते हैं। इन मॉडलों के आधार पर शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि गलत सूचना शायद प्राकृतिक दुनिया में सभी संचार प्रणालियों का एक मौलिक हिस्सा है, और यह उनके अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है।

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अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा

पहले कुछ जीवविज्ञानी गलत सूचना को एक छोटी-सी परेशानी मानते थे। जैसे, अगर कोई मछली बिना कारण भागती है, तो वह सिर्फ खाने में लगने वाला थोड़ा समय खो देती है, जिसका फायदा शिकारियों से बचने के लाभ से कम है। लेकिन हेन का तर्क है कि बहुत डरपोक मछली, जो बहुत ज्यादा झूठे अलार्म पर प्रतिक्रिया करती है, अपने अस्तित्व को खतरे में डाल सकती है।

हेन ने कहा, 'लागत सिर्फ एक दोपहर का भोजन खोना नहीं है। यह सभी दोपहर के भोजन को खोना है।' रोम के सैपिएन्जा विश्वविद्यालय के डेटा साइंटिस्ट वाल्टर क्वाट्रोचिओची ने हेन से सहमति जताई। उन्होंने कहा, 'यह दर्शाता है कि गलत सूचना कोई विसंगति या नैतिक विफलता नहीं है, बल्कि शोर, सीमित संदर्भ और अपूर्ण डिकोडिंग के तहत काम करने वाली संचार प्रणालियों का एक संरचनात्मक परिणाम है।'

झूठे अलार्म रोकने की रणनीति

मछली पर अपने रिसर्च के दौरान, हेन ने गलत सूचना को रोकने के लिए एक रणनीति भी खोजी। जब जानवर छोटे समूहों में तैरते हैं, तो वे अपने आस-पास की मछलियों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। लेकिन बड़े समूहों में उनका दिमाग उस संवेदनशीलता को कम कर देता है। हिलने के लिए उन्हें कई और मछलियों के मूवमेंट की जरूरत होती है। हेन ने पाया कि यह रणनीति झूठे अलार्म को पूरी तरह खत्म तो नहीं करती है, लेकिन उनके आकार को सीमित करती है। इससे झूठे अलार्म, पूरे झुंड पर हावी होने से पहले ही समाप्त हो जाते हैं।

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