
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान व्यापार, रक्षा और परमाणु ऊर्जा के साथ स्किल्ड लेबर को लेकर भी समझौता हुआ है जो दोनों देशों की जरूरतों को पूरा करेगा। पुतिन और पीएम मोदी के बीच हुए समझौते ने पूरी दुनिया को कई संदेश दिए हैं। एक तरफ अमेरिका को सीधे-सीधे मैसेज दिया गया कि उसके बिना भी दुनिया चल सकती है, दूसरी तरफ चीन को भी पुतिन ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि सिर्फ उसके भरोसे रूस नहीं है। दोनों देशों के समझौते ने दुनिया के मल्टी पोलर ध्रुव का नया खाका खींच दिया है।
भारत और रूस दोनों देशों के बीच श्रम गतिशीलता समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच कुशल मजदूरों की आवाजाही आसान होगी। इसका खासकर भारतीय श्रमिक वर्ग को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। रूसी नागरिकों के लिए 30 दिन तक के लिए फ्री वीजा सर्विस का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया। इससे रूस के नागरिक आसानी से भारत आ सकेंगे और इससे भारतीय पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
भारत और रूस दोनों देशों के बीच साल 2030 तक आपसी व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी दोनों देशों के बीच करीब 65 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है, जिसमें भारत के कम निर्यात को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इस मुद्दे पर खुद राष्ट्रपति पुतिन ने खुद कहा है कि रूसी बाजार भारतीय सामान के लिए खोला जाएगा। दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा कम करने पर भी जोर हे।
पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच जो सबसे अहम समझौता हुआ है वो है दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार। यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन यानी EAEU के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA पर जल्द बातचीत पूरी करने का संकल्प लिया गया है।
पुतिन के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और परमाणु ऊर्जा सहयोग चर्चाओं में हावी रहे। स्वास्थ्य, समुद्री सहयोग, उर्वरक और सीमा शुल्क सहित कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आठ दशकों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, फिर भी भारत-रूस की दोस्ती एक मार्गदर्शक तारे की तरह स्थिर रही है।
पुतिन ने वार्ता को रूस-भारत विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की भावना के अनुरूप बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने बताया कि अब 96 प्रतिशत व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं रुपये और रूबल में हो रहा है। ये यात्रा यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा था, जिस पर विश्व की राजधानियों की नजरें टिकी हुई थीं।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे ने पश्चिमी देशों से लेकर हमारे पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान को भी संदेश दिया। भारत की तरफ से अमेरिका और यूरोप के ये संदेश है कि वो उनकी शर्तों पर नहीं बल्कि अपने हितों की शर्तों पर पश्चिमी देशों से रिश्ते तय करेगा। वहीं चीन और पाकिस्तान की तरफ को भारत के ये संदेश है कि आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर रूस बिना शर्त भारत के साथ खड़ा है। रूस ने भी पश्चिमी देशों की पुतिन को अलग-थलग करने की नीति को इस दौरे से धराशायी कर दिया, वहीं चीन को भी संदेश मिला कि रूस सिर्फ उसके सहारे नहीं खड़ा है।
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