कुआलालंपुर: भारत और मलेशिया ने कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देश आतंकवाद से निपटने, खुफिया जानकारी साझा करने, समुद्री सुरक्षा मजबूत करने, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।
उनका मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र तेजी से दुनिया के विकास का केंद्र बन रहा है और वे आसियान देशों के साथ मिलकर इस पूरे क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। आतंकवाद को लेकर दोनों देशों का साफ संदेश है कि इस पर दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जा सकते और आतंकवाद से कोई समझौता नहीं होगा।
मलेशिया की दो दिन की यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मलेशियाई समकक्ष के साथ व्यापक बातचीत के बाद यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मलेशिया में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा के लिए सामाजिक सुरक्षा समझौता, पर्यटन के लिए मुफ्त ई-वीजा और भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई का मलेशिया में लागू होना, दोनों देशों के लोगों के लिए बड़े और उपयोगी कदम हैं।
संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया के रिश्ते खास हैं। दोनों देश समुद्री पड़ोसी हैं और सदियों से लोगों के बीच गहरे और आत्मीय संबंध रहे हैं। उन्होंने बताया कि मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। दोनों देशों की सभ्यताएं, साझा सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्य उन्हें एक-दूसरे से जोड़ते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देश आतंकवाद विरोधी प्रयासों, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को और मजबूत करेंगे। साथ ही रक्षा सहयोग को भी और व्यापक बनाया जाएगा। इसके अलावा रक्षा, एआई, डिजिटल तकनीक और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में मिलकर काम करने पर भी सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा समझौता, पर्यटन के लिए मुफ्त ई-वीजा और मलेशिया में यूपीआई की शुरुआत जैसे कदम दोनों देशों के नागरिकों की जिंदगी को आसान बनाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत और मलेशिया को तमिल भाषा के प्रति साझा प्रेम जोड़ता है। मलेशिया में तमिल भाषा शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में आज भी मजबूत और जीवंत रूप में मौजूद है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र दुनिया के विकास का इंजन बनकर उभर रहा है। भारत और मलेशिया, आसियान देशों के साथ मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए काम करेंगे। भारत, आसियान को केंद्र में रखकर सहयोग को प्राथमिकता देता है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए इन संस्थाओं में बदलाव जरूरी हैं। साथ ही उन्होंने दोहराया कि भारत और मलेशिया शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करेंगे और आतंकवाद पर उनका रुख बिल्कुल साफ है कि आतंकवाद पर कोई दोहरा रवैया नहीं और आतंकवाद से कोई समझौता नहीं।