Monsoon News: मार्च के महीने में देश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई है। इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर कहा कि इस साल बारिश से सामान्य से कम हो सकती है, जो लंबी अवधि के औसत (LPA) का 94 फीसदी होगी। इसकी बड़ी वजह El Niño को माना जा रहा है, जिसका असर बारिश पर पड़ सकता है। Skymet का कहना है कि चार महीनों में देशभर में औसतन 817 मिलीमीटर बारिश हो सकती है। हालांकि इसमें 5 फीसदी तक ऊपर या नीचे रहने की गुंजाइश भी बताई गई है।
एजेंसी ने यह भी कहा है कि इस साल देश में सूखे की आशंका करीब 30 फीसदी तक है, जबकि 40 फीसदी संभावना ऐसी है कि बारिश सामान्य से कम ही रहे। अब सबकी नजर सरकारी मौसम विभाग India Meteorological Department (IMD) पर टिकी हुई हैं। कहा जा रहा है कि सरकारी मौसम विभाग इस महीने के आखिर तक मानसून को लेकर अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी कर सकता है।
किस महीने कितनी होगी बारिश?
निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 2026 के मानसून सीजन में बारिश का पैटर्न संतुलित नहीं रहेगा। चार महीनों के इस सीजन में सिर्फ जून में सामान्य बारिश की उम्मीद जताई गई है, जबकि बाकी महीनों में बारिश औसत से कम रहने का अनुमान जताया गया है। स्काइमेट के अनुसार जून में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी एलपीए का करीब 101 फीसदी रह सकती है।
इस महीने के सामान्य रहने की संभावना 40 फीसदी है, जबकि 40 फीसदी संभावना इसे सामान्य से कम रहने की भी है। जून का एलपीए 165.3 मिमी है। जुलाई महीने में बारिश एलपीए के 95 फीसदी तक रहने का अनुमान है, यानी यह सामान्य से कम रह सकती है। जुलाई के लिए सामान्य और कम बारिश, दोनों की संभावना 40-40 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 280.5 मिमी है।
अगस्त-सितंबर में बारिश का हाल
अगस्त में भी बारिश की स्थिति कमजोर हो सकती है। स्काइमेट का अनुमान है कि इस महीने बारिश एलपीए के 92 फीसदी तक ही रह सकती है। अगस्त में कम बारिश होने की संभावना करीब 60 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 254.9 मिमी है। वहीं सितंबर में भी राहत के संकेत नहीं हैं। देशभर में औसत बारिश एलपीए के 89 फीसदी रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है।
सितंबर में कम बारिश होने की संभावना सबसे ज्यादा 79 फीसदी बताई गई है। इस महीने का एलपीए 167.9 मिमी है। कुल मिलाकर स्काइमेट के शुरुआती अनुमान से साफ है कि 2026 के मानसून में जून को छोड़कर बाकी तीनों महीनों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
अल नीनो की वापसी कमजोर मानसून का संकेत
स्काईमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल से सक्रिय 'ला नीना' की स्थिति अब समाप्त हो रही है। प्रशांत महासागर अब 'ईएनएसओ-न्यूट्रल' (ENSO-neutral) की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के शुरुआती चरण में 'अल नीनो' (El Niño) के विकसित होने की संभावना है, जो सीजन के दूसरे भाग में और मजबूत हो सकता है। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश के वितरण में अनियमितता देखने को मिल सकती है।